प्रिय दोस्तों! हमारा उद्देश्य आपके लिए किसी भी पाठ्य को सरलतम रूप देकर प्रस्तुत करना है, हम इसको बेहतर बनाने पर कार्य कर रहे है, हम आपके धैर्य की प्रशंसा करते है| मुक्त ज्ञानकोष, वेब स्रोतों और उन सभी पाठ्य पुस्तकों का मैं धन्यवाद देना चाहता हूँ, जहाँ से जानकारी प्राप्त कर इस लेख को लिखने में सहायता हुई है | धन्यवाद!

Tuesday, June 18, 2024

PF क्या है ? पीएफ में फॉर्म 31 क्या है? फार्म 19 क्या है? फार्म 10c क्या है?

June 18, 2024 0 Comments

Key Content:
PF क्या है ? 
पीएफ में फॉर्म 31 क्या है?
फार्म 19 क्या है?
फार्म 10c क्या है?


 PF क्या है

ईपीएफओ का पूरा नाम एम्पलाई प्रोविडेंट फंड ऑर्गेनाइजेशन कर्मचारी भविष्य निधि संगठन होता है यह एक तरह का बचत खाता जैसा होता है |


जिसमें कंपनी  और कर्मचारी दोनों की तरफ से पैसे जमा किए जाते हैं।


यह भारत में सभी कंपनियों के लिए अनिवार्य है, जिसमें हर महीने कर्मचारियों के सैलरी से कम करके इस खाते में जमा होते हैं, और साथ ही कंपनी भी  बराबर राशि हर महीने जमा करती है।


जो पैसा जमा होता रहता है उसको सेविंग खाते जैसा जो बैंक डिसाइड करती है जो सरकार डिसाइड करती है उसी  तरीके से उस पर ब्याज दिया जाता है।


पीएफ में फॉर्म 31 Form 31 क्या है?

यह फॉर्म तब भरा जाता है जब आप कंपनी में वर्किंग है, और आपको किसी पैसे की जरूरत हो तो आप Form 31 या PF एडवांस फॉर्म भर सकते हैं, फॉर्म भरने के लगभग एक सप्ताह के अंदर आपके अकाउंट में पैसा जमा हो जाता है |


फार्म 19 Form 19 क्या है?


फार्म 19 से आप अपना पूरा पीएफ अमाउंट निकाल सकते हैं, जब कंपनी आप छोड़ते हैं उसके 60 दिन बाद आप इस फार्म के लिए एलिजिबल हो जाते हैं भरने के लगभग 15 दिन के अंदर आपका पैसा जमा हो जाता है आपके खाते में।

फार्म 10c Form 10c क्या है?


पेंशन अमाउंट को निकालना के लिए कुछ टर्म्स एंड  कंडीशन होती हैं, अगर आपने 4.5 से ज्यादा और 9.5 से कम किसी भी कंपनी में वर्क किया है तो आप इस पेंशन अमाउंट को निकालने के लिए एलिजिबल होते हैं अगर आप 9.5  साल से ज्यादा काम किया है किसी कंपनी में तो आप पेंशन अमाउंट को निकाल नहीं सकते हैं वह आपको पेंशन के रूप में मिलता है 60 साल बाद।


फार्म 10c स्कीम सर्टिफिकेट Form 10c Scheme Certificate क्या है?


Form 10c Scheme Certificate तब भर जाता है जब पीएफ अकाउंट होल्डर की मृत्यु हो जाती है, उसके बाद जो भी नॉमिनी ऐड रहता है, पीएफ अकाउंट पर वह नॉमिनी इस फॉर्म को भरकर पूरे पैसे को निकाल सकता है ?

लेख@अम्बिका_राही

Saturday, June 8, 2024

Online Shopping Fraud Awareness | ऑनलाइन फ्रॉड से कैसे बचे

June 08, 2024 0 Comments

 Online Shopping Fraud Awareness | ऑनलाइन फ्रॉड से कैसे बचे 

Content:
How to Identify Fraud website | फ्रॉड वेबसाइट को कैसे पहचाने ?
Trust Of the Website | ट्रस्ट ऑफ़ द साइट
Cash on Delivery | कैश ऑन डिलीवरी
Cheapest Price | चीपेस्ट प्राइस
Third Party Ads On Website | थर्ड पार्टी एड्स ऑन वेबसाइट
How to Purchase Without Mistake | हाउ टू परचेस विदाउट मिस्टेक
Stability of website | स्टेबिलिटी ऑफ साइट
Review of the Customer | रिव्यू आफ कस्टमर
Cash On Delivery Unavailability | कैश ऑन डिलीवरी अनअवेलेबल
Promote Online mode payement | प्रमोट ऑनलाइन पेमेंट
Product Mismatch | प्रोडक्ट मिसमैच


दोस्तों आज हम इंटरनेट से इस प्रकार शॉपिंग करते हैं जैसे घर में ही दुकान है और तुरंत ऑर्डर कर दो।


और हमारी यही आदत फ्रॉड  करने वालों को अच्छी लगती है।

क्योंकि इंटरनेट सर्फ  करते हुए जैसे ही कुछ सस्ता दिखता है, तुरंत ही हमारे मन में उसे खरीदने का विचार आने लगता है।


और यहीं पर फ्रॉड करने वालों को मौका मिल जाता है।


How to Identify Fraud website | फ्रॉड वेबसाइट को कैसे पहचाने ?


पहचान करना थोड़ा मुश्किल होता है लेकिन कुछ बातों का ध्यान रखकर आप फ्रॉड से बच सकते हैं।


Trust Of the Website | ट्रस्ट ऑफ़ द साइट


आपको यह ध्यान में रखना होगा कि आप जिस भी प्लेटफार्म पर हैं वह कितना ट्रस्टेड है, अभी तक इस प्लेटफार्म से कोई खरीदारी हुई है कि नहीं,  किसी ने परचेस किया है कि नहीं,  और यदि खरीदा है तो उस कस्टमर ने कितना रेटिंग दिया है,  उसका फीडबैक भी आपको देख लेना चाहिए।


हमें कभी भी किसी नई वेबसाइट से कुछ खरीदते हैं तो  मन में एक डर सा लगा रहता है यह वेबसाइट ट्रस्टेड है या नहीं |


लेकिन मेरा यह मानना है कि मौका हर किसी को मिलना चाहिए, आज बड़ी-बड़ी कंपनियों जैसे अमेजॉन, फ्लिपकार्ट और भी बहुत कंपनी है, जिस पर कस्टमर ट्रस्ट करता है, शुरुआत इन कंपनियों ने भी जीरो से ही किया था।


इसलिए हम निम्नलिखित बातों का ध्यान में रखकर शॉपिंग कर सकते हैं।


Cash on Delivery | कैश ऑन डिलीवरी


ज्यादातर फ्रॉड शॉपिंग साइट पर Cash on Delivery डिलीवरी नहीं होती है,  इसलिए यदि आप किसी ऐसी वेबसाइट पर हैं, जो नई है या आपको ट्रस्ट नहीं है, जिसका रेटिंग सही नहीं है, यदि कैश ऑन डिलीवरी ऑप्शन नहीं है तो आपको शॉपिंग नहीं करना चाहिए।


Cheapest Price | चीपेस्ट प्राइस

यदि आपको किसी भी ऑनलाइन साइट पर बहुत ही सस्ता सामान मिल रहा है तो आप थोड़ा सतर्क हो जाइए, क्योंकि हो सकता है आपको टारगेट किया जा रहा हो।


Third Party Ads On Website | थर्ड पार्टी एड्स ऑन वेबसाइट


यदि किसी भी ऑनलाइन शॉपिंग साइट पर गूगल एड्स या कोई थर्ड पार्टी ऐड चल रही है, तो यह प्रोफेशनल नहीं लगता और कोई भी बड़ी कंपनी को अपनी वेबसाइट पर ऐड चलाने की जरूरत भी नहीं होती है, लेकिन यहां एक चीज और हम सोच सकते हैं पॉजिटिव वे में,

" हो  सकता है कोई स्टार्टअप शुरू किया हो और बजट की कमी के कारण ऐड रन कर रहा हो वेबसाइट पर"|


How to Purchase Without Mistake | हाउ टू परचेस विदाउट मिस्टेक


Stability of website | स्टेबिलिटी ऑफ साइट


किसी नई शॉपिंग साइट से परचेस कर रहे हैं तो यह देख लीजिए कि वह वेबसाइट कितना पुराना है आप उसके लिए गूगल कर सकते हैं गूगल आपको उसका रजिस्ट्रेशन डेट बता देगा।


यदि वह Genuine साइट है 8-10 साल से चल रही है तो आप परचेस कर सकते हैं।


Review of the Customer | रिव्यू आफ कस्टमर

जब भी कोई परचेज से खुश होता है, तो कुछ ना कुछ रेटिंग जरूर करता है, जिससे पता चलता है कि वह कस्टमर कितना खुश है इस प्रोडक्ट से,  रेटिंग आपको भी करना चाहिए जिससे अन्य लोगों को ट्रस्ट हो और उनकीमदद हो सके।


Cash On Delivery Unavailability | कैश ऑन डिलीवरी अनअवेलेबल

कोई ट्रस्टेड साइट है तो कैश ऑन डिलीवरी Unavlvility है तो कोई बात नहीं, यदि इसमें कैश ऑन डिलीवरी नहीं है तो हमें परचेज करना चाहिए, लेकिन वह साइड आपके लिए बिल्कुल नई  है तो, आपको ऑनलाइन पेमेंट से बचना चाहिए।


Promote Online mode payement | प्रमोट ऑनलाइन पेमेंट

जितने भी फ्रॉड  साइट हैं ऑनलाइन पेमेंट ही प्रेफर करते हैं, ध्यान दीजिए नई साइट है तो कैश ऑन डिलीवरी ऑर्डर कीजिए फ्रॉड से बचे रहेंगे।


Product Mismatch | प्रोडक्ट मिसमैच

किसी  ऑर्डर में यदि हमें कोई डिफरेंट चीज मिल रहा है, तो इससे वेबसाइट फ्रॉड नहीं हो जाती, जो सेलर प्रोडक्ट भेज रहा है,वह गड़बड़ कर रहा है, और यदि आपके साथ ऐसा हुआ है तो आप शॉपिंग कस्टमर केयर से बात करके सामान रिप्लेस या रिफंड करा सकते हैं।


एक रियल फ्रॉड केस आपके साथ साझा कर रहा हूं | 


मेरा एक दोस्त था एक वेबसाइट से कुछ परचेज करता है, पेमेंट भी कर देता है उसके बाद उसे एक ईमेल आता है, कि वह प्रोडक्ट अवेलेबल नहीं है रिफंड के लिए उसका अकाउंट डिटेल मांगा गया और वह अकाउंट डिटेल और बाकी चीज वह ओटीपी दे देता है, फिर उसका अकाउंट खाली हो जाता है |  तो आपको इन सब से सावधान रहना है सतर्क रहना है जिससे आप इंटरनेट पर अपनी शॉपिंग आसानी से कर सकें और खुश रह सके।


लेख@अम्बिका_राही

Saturday, April 13, 2024

लिनक्स OS क्या है ? लिनेक्स कई विशेषता और उसके प्रकारों के बारे में विस्तार समझाइए ?

April 13, 2024 0 Comments

 लिनक्स OS  क्या है ? लिनेक्स कई विशेषता और उसके प्रकारों  के बारे में विस्तार समझाइए ?


Content:
1. लिनक्स OS  क्या है ?
2. कुछ प्रसिद्द लिनेक्स OS के नाम बताइए?
3. Ubuntu

4. Fedora
5. Debian
6. Cent OS
7. Arch Linux


1. लिनक्स OS  क्या है ?

    लिनेक्स एक Open Source ऑपरेटिंग सिस्टम है, जो अपनी Familier type  कई वजह से कई प्रकार से मिलता है |

साफ़ शब्दों में कहें तो - कई कम्पनी लिनेक्स OS बनाती है, जो अपनी अलग - अलग layout या User Interface कई वजह से मार्किट में पहचानी जाती है |

2. कुछ प्रसिद्द लिनेक्स OS के नाम बताइए?


    लिनेक्स OS अपनी सुरक्षा, स्थिरता और कोमलता Flaxibility  के लिए प्रसिद्द है |

जिसके कई प्रकार उपलब्ध है, जिसमें से कुछ के नाम नीचे दिए गए है जो ज्यादा उपयोग में लिए जाते है -

1. Ubuntu

2. Debian

3. Cent OS
4. Arch Linux



1. Ubuntu OS क्या है ?
    Ubuntu बहुत ही लोकप्रिय लिनेक्स OS है, जो ओपन सोर्स है जिसको आप इन्टरनेट से फ्री में डाउनलोड करके उपयोग कर सकते है |
 इसका लेआउट लगभग Debian OS के जैसा ही होता है |
इस OS का उद्देश्य उच्च क्वालिटी का सिस्टम और उपयोग कर्ता के लिए. सवेदन शील और आसानी से होने वाला वातावरण बनाना है |
Ubuntu ग्राफिकल Interface (GUI) के साथ आता है, जिससे उपयोग कर्ता के लिए उपयोग करना बहुत सरल हो जाता है |

फेडोरा (Linux) लाइनेक्स ऑपरेटिंग सिस्टम क्या है? 



Fedora Linux ऑपरेटिंग सिस्टम सबसे प्रसिद्ध ऑपरेटिंग सिस्टम है, जिसे Red Hat कंपनी द्वारा बनाया गया है, जो ओपन सोर्स कंपनी के आधार पर कार्य करती है।



फेडोरा ऑपरेटिंग सिस्टम मुख्यतः नई-नई तकनीक औरनई तकनीक के  संगठन और डेवलपर्स के लिए बेहतर  माहोल या प्लेटफार्म बनाने पर कार्य करता है, जिससे डेवलपर को एक अच्छा माहौल दे सके।



फेडोरा की विशेषता है यह हमेशा नई संस्करण या अपडेट पर कार्य करता है, इसलिए इसे  हैकर की पसंद का का ऑपरेटिंग सिस्टम बोले तो कुछ गलत नहीं होगा।



फेडोरा को इसके उपयोग के आधार पर कई रूपों में बांटा गया है।

Fedora work station
Fedora server
Fedora core OS
Fedora iot
Fedora cloud



Debian OS ऑपरेटिंग सिस्टम क्या है?

Debian OS भी एक ओपन सोर्स ऑपरेटिंग सिस्टम है, जिनके अलग-अलग संस्करण उसके कार्य के आधार पर विकसित किया गया है।



Debian OS सिस्टम के संस्करण नीचे दिए गए हैं।

Devian stable
Devian testing
Debian unstable



Cent ऑपरेटिंग सिस्टम क्या है



Cent ऑपरेटिंग सिस्टम का पूरा नाम कम्युनिटी एंटरप्राइज ऑपरेटिंग सिस्टम है, जो एक ओपन सोर्स ऑपरेटिंग सिस्टम है।

कोई भी आसानी से इंटरनेट से डाउनलोड करके उसको इंस्टॉल करके उपयोग में ला सकता है।



यह एक लाइनेक्स कमर्शियल डिस्ट्रीब्यूटर कंपनी RHEL द्वारा बनाया गया है।



इसके मुख्यतः दो प्रकार हैं



Send OS
Send OS stream


Arch लाइनेक्स ऑपरेटिंग सिस्टम क्या है


आज लाइनेक्स का उद्देश्य सरलता स्थिरता न्यूनतमता प्रदान करना है, जिसे यूजर आसानी से उपयोग में ला सके।




Artical@Ambika_Rahee

Monday, March 18, 2024

कंप्यूटर क्या है? सबसे आसान शब्दों में बताएं?

March 18, 2024 0 Comments

कंप्यूटर क्या है? सबसे आसान शब्दों में बताएं? 


कई इलेक्ट्रॉनिक समूहों को व्यवस्थित कर बनाया गया, पूरी तरह से इलेक्ट्रॉनिक उपकरण है, जो सोफ्टवेर या दिए गए सूचना के आधार पर हमें परिणाम देता है, कंप्यूटर कहलाता है |

कंप्यूटर को हम सूचना कैसे देते है? या आदेश कैसे दे सकते है ?


कंप्यूटर से हम बातचीत या COMMUNICATION करने के लिए कुछ उपकरण का उपयोग करते है, जैसे - कीबोर्ड, माउस, कैमरा, स्कैनर, ब्लूटूथ, wi-fi, मोबाइल अन्य कई मदत से हम कम्युनिकेशन साझा कर सकते है | 

कंप्यूटर का उत्तर या जवाब कैसे देख सकते है ?


कंप्यूटर का उत्तेर हमें कंप्यूटर में लगे monitor या आप टीवी डिस्प्ले में देख सकते है?

Tuesday, January 16, 2024

विंडोज कंप्यूटर पर किसी वेबसाइट को ब्लाक करने का सबसे आसान तरीका

January 16, 2024 0 Comments

विंडोज कंप्यूटर पर किसी वेबसाइट को ब्लाक करने का सबसे आसान तरीका   

अब आप अपने कंप्यूटर सिस्टम को इंटरनेट की दुनिया में और भी सुरक्षित बना सकते हैं मिडिल क्लास फैमिली में ज्यादातर  सभी लोग एक ही कंप्यूटर  का उपयोग करते हैं, जिसमें वयस्क और बच्चे भी शामिल होते हैं|



 लेकिन कभी-कभी क्या होता है कि हमारे बच्चे  किसी ऐसी वेबसाइट को  विजिट कर लेते हैं, जिस पर उन्हें नहीं होना चाहिए था,  


इसीलिए आपको यह जानना अति आवश्यक हो जाता है जिसे आप अपने कंप्यूटर सिस्टम को अपनी जरूरत के हिसाब से व्यवस्थित  कैसे कर सकते हैं, और उसे पर कौन सी वेबसाइट ओपन होगी कौन से नहीं , यह आप सुनिश्चित कर सकते हैं,  जिसे आपके बच्चों को उसे वेबसाइट पर  विजिट होने से रोका जा सके|



 वैसे तो वेबसाइट ब्लॉक करने के कई तरीके हैं लेकिन मैं आपको सबसे आसान तरीका बताऊंगा जिससे आप किसी भी वेबसाइट को ब्लॉक कर सकते हैं|


 जिसमें सबसे आसान है विंडो होस्ट फाइल को अपडेट  करके|


  विंडो होस्ट फाइल को अपडेट करने के लिए आपको सबसे पहले अपने सिस्टम फोल्डर में आ जाना है,  वहां आपको विंडो पर क्लिक करना रहेगा,  विंडो के बाद आपको System32 पर क्लिक करना रहेगा,  उसके बाद आपको ड्राइवर के फोल्डर में,  etc नाम के फोल्डर पर क्लिक करना रहेगा,  अब यहां पर आपको  विंडो होस्ट फाइल दिखेगी|


C:\Windows\System32\drivers\etc


  विंडो होस्ट फाइल को एडिट करने के लिए सबसे पहले होस्ट फाइल को कॉपी करना रहेगा, और कहीं बाहर आपको पेस्ट करके ही एडिट कर सकते हैं क्योंकि जहां पर आपका होस्ट फाइल अपडेटेड है ,  वह सिस्टम फोल्डर है जिससे आप वहां पर एडिट नहीं कर सकते|


 एडिट करने के लिए आपको कुछ चीजों का ध्यान में रखना रहेगा सबसे पहले चीज के आगे अगर # लगा हुआ है तो इसका मतलब होता है  वह फाइल या  यूआरएल एग्जीक्यूटिव  रहेगी  या वह ब्लॉक नहीं रहेगी |


 आपको कोई भी यूआरएल ब्लॉक करने के लिए होस्ट फाइल में सबसे नीचे एक इंटर लगाएंगे उसके बाद आपको आईपी लिखनी पड़ेगी 0.0.0.0 और उसके बाद आपको एक स्पेस देना है स्पेस देने के बाद आपको वेबसाइट का नाम लिख देना है उदाहरण के लिए जैसे आपको google.com को ब्लॉक करना है तो सबसे पहले आप समझ लीजिए कि गूगल को हम दो तरीके से लिख सकते हैं 


 या तो google.com डायरेक्ट लिख सकते हैं दूसरा www.google.com लिख सकते हैं इसलिए हम दोनों तरीके से लिखकर उसको ब्लॉक करेंगे|


 उदाहरण के लिए


0.0.0.0 google.com


0.0.0.0 www.google.com





 किसी भी वेबसाइट को ब्लॉक करने के लिए आपको इसी क्रम में इस आईपी के साथ डोमेन नेम या फिर किसी वेबसाइट का नाम लिख सकते हैं आपकी विंडोज  कंप्यूटर पर वह वेबसाइट एक्सेस होना बंद हो जाएगी |

लेख@अम्बिका_राही 

धन्यवाद!

Saturday, December 16, 2023

FTP सर्वर के साथ मोबाइल को पीसी से कैसे कनेक्ट करें ?

December 16, 2023 0 Comments

 FTP सर्वर के साथ मोबाइल को पीसी से कैसे कनेक्ट करें



अपने मोबाइल डिवाइस को एफटीपी सर्वर के साथ पीसी से कनेक्ट करने के लिए आप निम्नलिखित सामान्य चरणों का पालन कर सकते हैं। यह ध्यान दें कि ये विशिष्ट चरण थोड़ी बदल सकते हैं आपके मोबाइल डिवाइस पर एफटीपी सर्वर एप्लिकेशन का उपयोग करने के लिए।


एफटीपी सर्वर ऐप इंस्टॉल करें:


अपने मोबाइल डिवाइस पर, एफटीपी सर्वर एप्लिकेशन को एप्लिकेशन स्टोर से इंस्टॉल करें। कुछ पॉपुलर विकल्पों में "FTP Server" (एंड्रॉयड के लिए) और "FTPManager" (iOS के लिए) शामिल हैं।

एक ही वाई-फाई नेटवर्क से कनेक्ट करें:


सुनिश्चित करें कि आपका मोबाइल डिवाइस और पीसी एक ही वाई-फाई नेटवर्क से कनेक्ट हैं।

मोबाइल पर एफटीपी सर्वर स्टार्ट करें:


अपने मोबाइल डिवाइस पर एफटीपी सर्वर एप्लिकेशन खोलें और सर्वर स्टार्ट करें। आपको उपयोगकर्ता नाम, पासवर्ड, और साझा करने के लिए फ़ोल्डर जैसी सेटिंग्स को कॉन्फ़िगर करने की आवश्यकता हो सकती है।

एफटीपी सर्वर पता नोट करें:


एप्लिकेशन एक एफटीपी सर्वर पता दिखाएगा (उदाहरण के लिए, ftp://192.168.1.2:2121)। इस पते को नोट करें क्योंकि आपको इसकी आवश्यकता पड़ेगी पीसी से कनेक्ट करने के लिए।

पीसी पर एफटीपी क्लाइंट का उपयोग करें:


अपने पीसी पर, एक एफटीपी क्लाइंट खोलें। विंडोज एक्सप्लोरर को एक एफटीपी क्लाइंट के रूप में उपयोग किया जा सकता है। फाइल एक्सप्लोरर खोलें, पते में एफटीपी सर्वर पता डालें (उदाहरण के लिए, ftp://192.168.1.2:2121), और एंटर दबाएं।

क्रेडेंशियल्स दर्ज करें:


यदि पूछा जाए, तो आपके मोबाइल एफटीपी सर्वर एप्लिकेशन पर सेट किए गए उपयोगकर्ता नाम और पासवर्ड दर्ज करें।

फ़ाइलों का उपयोग:


एक बार कनेक्ट हो जाने पर, आप एफटीपी क्लाइंट के माध्यम से अपने मोबाइल डिवाइस और पीसी के बीच फ़ाइलें ब्राउज़ और ट्रांसफर कर सकते हैं।

डिस्कनेक्ट:


जब आप काम खत्म कर लेते हैं, सुनिश्चित हो जाए कि आप एफटीपी सर्वर से सही रूप से डिस्कनेक्ट हो रहे हैं ताकि आपका कनेक्शन सुरक्षित हो सके।

अतिरिक्त सुझाव:

सुनिश्चित करें कि आपके दोनों डिवाइसों पर फ़ायरवॉल या सुरक्षा सॉफ़्टवेयर एफटीपी कनेक्शन की अनुमति देता है।

कुछ एफटीपी सर्वर एप्लिकेशन आपको साझा करने के लिए विशिष्ट फ़ोल्डर सेट करने की अनुमति देते हैं। इस तरह के विकल्पों के लिए एप्लिकेशन सेटिंग्स की जाँच करें।

सुनिश्चित करें कि एफटीपी सर्वर एप्लिकेशन आपके मोबाइल डिवाइस पर सही ढंग से चल रहा है जब आप प्रयास कर रहे हैं कनेक्ट करने के लिए।



लेख@अम्बिका_राही 

धन्यवाद!

Friday, December 15, 2023

विंडोज़ थीम कैसे बनाएं? विस्तार में समझाइए ?

December 15, 2023 0 Comments

 विंडोज़ थीम कैसे बनाएं? विस्तार में समझाइए ?


Windows थीम बनाने के लिए आपको विभिन्न तत्वों को डिज़ाइन और अनुकूलित करना होता है, जैसे कि वॉलपेपर, आइकन, ध्वनि, और रंग। यहां एक सामान्य मार्गदर्शन है जो आपको Windows थीम बनाने में मदद कर सकता है:


साधन तैयार करें:


वॉलपेपर: 

सबसे पहले अपने डेस्कटॉप के लिए उच्च रेज़ोल्यूशन छवियों का चयन करें जो भी छवि आप उपयोग में लेना चाहते है ।

आइकन: 

फ़ोल्डर और शॉर्टकट्स के लिए कस्टम आइकन्स ढूंढें या बनाएं।

ध्वनि: 

यदि आप चाहें, तो आप सिस्टम ध्वनि को अनुकूलित कर सकते हैं।

नया फ़ोल्डर बनाएं:


अपने थीम फ़ाइल्स को व्यवस्थित करने के लिए एक नया फ़ोल्डर बनाएं। इसे उपयुक्त नाम दें।

वॉलपेपर को अनुकूलित करें:


अपने चयनित वॉलपेपर को फ़ोल्डर में रखें।

डेस्कटॉप पर यह सेट करने के लिए राइट-क्लिक करें, "व्यक्तिगतीकरण" में जाएं, और अपने थीम फ़ोल्डर से एक बैकग्राउंड चुनें।

आइकन को अनुकूलित करें:


मुख्यपृष्ठ और शॉर्टकट्स के लिए आपके चयनित आइकन्स को रखें।

राइट-क्लिक करें, "संपत्ति" में जाएं, और "आइकन बदलें" का चयन करें ताकि आप कस्टम आइकन का चयन कर सकें।

ध्वनि को अनुकूलित करें (ऐच्छिक):


यदि आप सिस्टम ध्वनि बदलना चाहते हैं, तो "नियंत्रण पैनल" > "ध्वनि" > "ध्वनियाँ" टैब में जाएं।

स्टार्टअप, शटडाउन, आदि के इवेंट्स के लिए कस्टम ध्वनियों को असाइन करें।

रंग सेटिंग्स:


"व्यक्तिगतीकरण" > "रंग" में जाएं ताकि आप रंग स्कीम को अनुकूलित कर सकें।

विंडो बॉर्डर, टास्कबार, और स्टार्ट मेनू के रंगों को समायोजित करें।

आपकी थीम को सहेजें:


एक बार जब आपने सभी तत्वों को अनुकूलित कर लिया है, डेस्कटॉप पर राइट-क्लिक करें, "व्यक्तिगतीकरण" में जाएं, और "थीम्स" क्लिक करें।

"थीम सहेजें" पर क्लिक करें और अपनी थीम के लिए एक नाम प्रदान करें।

थीम साझा करें (ऐच्छिक):


अगर आप अपनी थीम को दूसरों के साथ साझा करना चाहते हैं, तो आप थीम फ़ोल्डर को एक ZIP फ़ाइल में संकुचित करके और शेयर करके कर सकते हैं।

लेख@अम्बिका_राही 

Thursday, December 14, 2023

किरण क्या है ? आयनाइजिंग किरण किसे कहते है? नॉन-आयनाइजिंग किरण किसे कहते है ?

December 14, 2023 0 Comments

 किरण क्या है ? आयनाइजिंग किरण किसे कहते है? नॉन-आयनाइजिंग किरण किसे कहते है ? 

Key Content:
किरण क्या है ? 
किरण की परिभाषा विस्तार में समझाइए?
आयनाइजिंग किरण किसे कहते है? 
नॉन-आयनाइजिंग किरण किसे कहते है ?

किरण क्या है ?

रणें ऊर्जा के प्रवाह को संदर्भित करने वाली रद्दी या प्रकाशमान तरंगें होती हैं, जो विभिन्न प्रकार की हो सकती हैं। यहां कुछ आम किरणों की परिभाषा है:


इलेक्ट्रोमैग्नेटिक किरणें:


इनमें ऊर्जा को वाहित करने के लिए इलेक्ट्रॉमैग्नेटिक क्षेत्र का उपयोग होता है।

उच्च ऊर्जा की इलेक्ट्रोमैग्नेटिक किरणें गैमा किरणें और एक्स-किरणें होती हैं, जो अक्सर रेडियोएक्टिव स्रोतों से निकलती हैं।

न्यूट्रॉन, प्रोटॉन, और इलेक्ट्रॉनों के द्वारा उत्पन्न होने वाली विभिन्न प्रकार की किरणें इस श्रेणी में आती हैं।

प्रकाश की किरणें:


इनमें वायुमंडल, जल, और कच्चे सोने की अणुओं को छूने के लिए बनी होती हैं।

प्रकाश की किरणें दृश्य क्षेत्र के अलावा अन्य क्षेत्रों में भी पाई जा सकती हैं, जैसे इंफ्रारेड, ऊर्जा, और उभय ऊर्जा की किरणें।

ध्वनि की किरणें:


इनमें ऊर्जा को शब्द के रूप में पहुंचाने के लिए ध्वनि के क्षेत्र का उपयोग होता है।

इसमें संगीतीय तरंगें और स्वर की किरणें शामिल होती हैं, जो हमारी कानों द्वारा सुनी जा सकती हैं।

इनमें से प्रत्येक किरण प्रकार अपनी विशेषित गुणधर्मों और उपयोगों के लिए महत्वपूर्ण हैं।

किरणों के प्रकार


किरणें विभिन्न प्रकार की होती हैं, और इन्हें उनके ऊर्जा स्तर और स्वभाव के आधार पर विभाजित किया जा सकता है। यहां कुछ सामान्य प्रकार की किरणें हैं:


विद्युत चुंबकीय विकिरण:


गैमा किरणें: 

इसमें अधिक ऊर्जा होती है और यह अक्सर रेडियोएक्टिव अपघटों के दौरान उत्पन्न होती हैं।


यह उच्च ऊर्जा विकिरण है जिसकी तुलना में उल्ट्रा-वायलेट प्रकाश से छोटी तरंगदैर्गा होती है, और इसे आमतौर पर चिकित्सा छवियों में उपयोग किया जाता है।

कणों:


आल्फा कणें: 

ये दो प्रोटॉन और दो न्यूट्रॉनों से मिलकर बनी होती हैं, और इन्हें कुछ प्रकार के रेडियोएक्टिव सामग्रियों से उत्पन्न किया जाता है।

बीटा कणें:

कुछ प्रकार के रेडियोएक्टिव अपघटों के दौरान उत्पन्न होने वाले उच्च ऊर्जा, उच्च गति वाले इलेक्ट्रॉन या पॉजिट्रॉन होते हैं।

प्रकाश:


प्रकाश की किरण:

 एक पतली प्रकाश की बूंद है जो सीधे रेखा में चलती है।

ध्वनि:


ध्वनि की किरणें: 

एक माध्यम में चलने वाली विव्रेचनाएं, जिसे ध्वनि की किरणें कहा जाता हैं।


किरण की परिभाषा विस्तार में समझाइए ?

किरण एक प्रकार की ऊर्जा है जो रैडिएशन के रूप में प्रकट होती है और अद्भुत रूप से विभिन्न प्राकृतिक प्रक्रियाओं, वैज्ञानिक एवं तकनीकी उपयोगों में प्रवृत्ति करती है। यह ऊर्जा बेहद सूक्ष्म रेडिएशन से लेकर उच्च-ऊर्जा गैमा किरणों जैसे उच्च ऊर्जा की धारिता तक विभिन्न रूपों में प्रस्तुत हो सकती है। यहां कुछ मुख्य प्रकार की किरणें और उनकी विशेषताएं हैं:


इलेक्ट्रोमैग्नेटिक किरणें:


रैडियो विकिरण: 

इसमें सबसे कम ऊर्जा होती है और इसका उपयोग रेडियो संगीत, टेलीविजन, और दूरदराज कम्युनिकेशन में होता है।

माइक्रोवेव विकिरण:

 इसकी तरंगें वस्तुओं को गरम करने के लिए उपयोग होती हैं, जैसे कि माइक्रोवेव ओवन।

इन्फ्रारेड विकिरण: 

इसका उपयोग गर्मी को महसूस करने के लिए किया जाता है, जैसे कि रिमोट सेंसर्स और नाइट विजन में।

विजिबल लाइट: 

इसमें सबसे अधिक प्रमुख तरंगें होती हैं और इसका उपयोग हमारे द्वारा दृश्य के रूप में किया जाता है।

चुंबकीय विकिरण:


आल्फा, बीटा, और गैमा किरणें: इनमें अलग-अलग प्रकार के चुंबकीय विकिरण होता है, जो रेडिओएक्टिव सामग्रीयों से उत्पन्न होता है और इन्हें चिकित्सा और उद्योगों में उपयोग किया जाता है।

अधिष्ठान किरणें:


न्यूट्रीनो:

 इसे अदृश्य अधिष्ठान कहा जाता है, क्योंकि यह अदृश्य है और इसका परिमाण बहुत कम होता है। न्यूट्रीनो का अध्ययन भौतिकी और सौंदर्यशास्त्र में महत्वपूर्ण है।


आयनाइजिंग किरण किसे कहते है? 


आयनाइजिंग किरण वह किरणें हैं जो परमाणु या अणु को इयोनाइज करने की क्षमता रखती हैं, अर्थात्, वे किरणें जो एक परमाणु से एक या एक से अधिक इलेक्ट्रॉन को हटा सकती हैं और उसे आयन (ion) बना सकती हैं। ये किरणें ऊर्जा के बहुत उच्च स्तर पर होती हैं और इसलिए वे आयनिजेशन प्रक्रिया को प्रारंभ कर सकती हैं, जिससे धातु, अणु, और अन्य रासायनिक पदार्थों को आयन बनाने में सक्षम हैं।


आयनाइजिंग किरण कुछ प्रमुख प्रकार की होती हैं:


गैमा-किरणें (Gamma Rays): 

ये बहुत उच्च ऊर्जा की इलेक्ट्रोमैग्नेटिक किरणें हैं, जो अक्सर रेडियोएक्टिव अपघटों के दौरान उत्पन्न होती हैं और आयनिजेशन क्षमता रखती हैं।


एक्स-किरणें (X-Rays):

 ये भी इलेक्ट्रोमैग्नेटिक किरणें हैं, जो बहुत उच्च ऊर्जा की होती हैं और विशेषकर चिकित्सा में चिकित्सा तथा इमेजिंग के लिए उपयोग की जाती हैं।


आल्फा-कणें (Alpha Particles) और बीटा-कणें (Beta Particles): 

ये चुंबकीय विकिरण के रूप में होते हैं, और विभिन्न प्रकार के रेडियोएक्टिव अपघटों के दौरान उत्पन्न हो सकते हैं।


आयनाइजिंग किरण का उपयोग चिकित्सा, इमेजिंग, रेडियोथेरेपी, और अन्य वैज्ञानिक और तकनीकी अनुसंधानों में होता है, लेकिन इनका सही और सतर्कता से उपयोग किया जाना चाहिए, क्योंकि ये ऊर्जा के स्तर की बड़ी मात्रा में होती हैं और असावधानी से इसका संपर्क नुकसानकारी हो सकता है।


नॉन-आयनाइजिंग किरण किसे कहते है ?

नॉन-आयनाइजिंग किरण वह किरणें हैं जो परमाणु या अणु को आयनिज करने में असमर्थ होती हैं, यानी इनकी ऊर्जा ऐसी होती है जिससे वे इलेक्ट्रॉन को हटा नहीं सकती हैं और उसे आयन नहीं बना सकती हैं। इन किरणों की ऊर्जा कम होती है और इसलिए वे जीवों और अन्य सामग्रियों को प्रभावित करने में कम हानिकारक होती हैं।


कुछ प्रमुख नॉन-आयनाइजिंग किरणें निम्नलिखित होती हैं:


रेडिओ विकिरण:

 इसमें सबसे कम ऊर्जा होती है और इसका उपयोग रेडियो संगीत, टेलीविजन, और दूरदराज कम्युनिकेशन में होता है।


माइक्रोवेव विकिरण: 

इसकी तरंगें वस्तुओं को गरम करने के लिए उपयोग होती हैं, जैसे कि माइक्रोवेव ओवन।


इन्फ्रारेड विकिरण: 

इसका उपयोग गर्मी को महसूस करने के लिए किया जाता है, जैसे कि रिमोट सेंसर्स और नाइट विजन में।


विजिबल लाइट: 

इसमें सबसे अधिक प्रमुख तरंगें होती हैं और इसका उपयोग हमारे द्वारा दृश्य के रूप में किया जाता है।


उच्च विकिरण विकेंद्रीय (Ultraviolet Radiation): 

ये सूर्य के किरणों का एक हिस्सा हैं और इनका प्रमुख उपयोग सूर्य रक्षा क्रीमों और भौतिकीय सामग्रियों के सूर्य ताप से संरक्षण में होता है।


रेडिएशन स्पेक्ट्रम के अन्य क्षेत्रों में किरणें: 

इनमें विशेषज्ञ क्षेत्रों के लिए उपयोग होती हैं, जैसे कि माइक्रोवेव संवाद, इन्फ्रारेड तस्वीरें, और अन्य सूचना संबंधित क्षेत्रों में किरणें।


लेख@अम्बिका_राही 

Tuesday, December 12, 2023

नेटवर्क क्या है ? मोबाइल नेटवर्क क्या है? मोबाइल नेटवर्क के कितने प्रकार है? 5G नेटवर्क और 4G नेटवर्क में क्या अंतर है? मोबाइल में सार वैल्यू का क्या महत्त्व है?

December 12, 2023 0 Comments

नेटवर्क (Network) 

नेटवर्क क्या है ?
मोबाइल नेटवर्क क्या है?
मोबाइल नेटवर्क के कितने प्रकार है?
5G नेटवर्क और 4G नेटवर्क में क्या अंतर है?
मोबाइल में सार वैल्यू का क्या महत्त्व है?


नेटवर्क क्या है ?

नेटवर्क एक तकनीकी शब्द है जो विभिन्न डिवाइस और सिस्टम को एक दूसरे से जुड़ने के लिए इस्तेमाल होता है। इसमें कंप्यूटर, स्मार्टफोन, राउटर, स्विच, और अन्य डिवाइसेस शामिल हो सकते हैं जो डेटा और संदेश एक दूसरे के साथ साझा करने के लिए काम करते हैं। नेटवर्क की मदद से लोग एक दूसरे के साथ इंटरनेट, फाइलें, प्रिंटर्स, और अन्य संसाधनों का इस्तेमाल कर सकते हैं। यह एक समृद्धि तकनीकी और सामाजिक संबंधों का नेटवर्क बनाने में मदद करता है।


मोबाइल नेटवर्क क्या है?

मोबाइल नेटवर्क एक तकनीकी संरचना है जो मोबाइल फोन, स्मार्टफोन, और अन्य आधुनिक पोर्टेबल डिवाइसेस को जोड़कर रखने में मदद करती है। यह नेटवर्क वायरलेस तकनीक का उपयोग करके किया जाता है, जिससे लोग अपने मोबाइल डिवाइसेस का इंटरनेट तक पहुंच सकते हैं और एक दूसरे के साथ डेटा साझा कर सकते हैं।


मोबाइल नेटवर्क विभिन्न प्रकार के तकनीकी प्रोटोकॉल्स और तंतु संसाधनों का इस्तेमाल करता है, जैसे कि 2G, 3G, 4G, और 5G इस्तेमाल करते हैं। यह लोगों को संवाद करने, इंटरनेट ब्राउज़ करने, आवृत्ति साझा करने, और अन्य ऑनलाइन गतिविधियों का आनंद लेने में सहायक होता है। मोबाइल नेटवर्क व्यापक रूप से लोकल एरिया नेटवर्क (LAN) और ग्लोबल एरिया नेटवर्क (GAN) को सम्मिलित करने में मदद करता है, जिससे लोग दुनियाभर में जुड़ सकते हैं।


मोबाइल नेटवर्क के कितने प्रकार है?

मोबाइल नेटवर्क कई प्रकार के हो सकते हैं, जो विभिन्न पीढ़ियों और स्थानों के लिए विकसित किए गए हैं। निम्नलिखित हैं कुछ मुख्य प्रकार:


2G (Second Generation): 

यह पुरानी पीढ़ी का है और आवृत्ति और डेटा स्थितियों में सुधार के साथ आया था।


3G (Third Generation): 

यह तेज़ डेटा स्पीड और आधुनिक सुविधाओं को लेकर आया था, जिसमें वीडियो कॉलिंग, फास्ट इंटरनेट सर्फिंग, और अन्य विशेषताएँ शामिल हैं।


4G (Fourth Generation):

 यह डेटा स्पीड में और भी वृद्धि किया और बेहतर सुविधाएँ प्रदान की गईं। इसमें वॉयस ओवर लैट (VoLTE) भी शामिल है, जिससे ध्वनि कॉलिंग की गई है।


5G (Fifth Generation): 

यह सबसे नवीन प्रकार है और बहुतेज उच्च गति, कम लैटेंसी, और बेहतरीन कनेक्टिविटी प्रदान करने का लक्ष्य है। 5G नेटवर्क अभी विभिन्न क्षेत्रों में विकसित हो रहा है।


इनके अलावा, व्यक्तिगत नेटवर्क भी हैं जैसे कि Wi-Fi जो घर और कार्यालय में इस्तेमाल होता है, और व्यापारिक नेटवर्क जो बड़े स्थानों और उद्योगों के लिए विकसित किया जाता है।


5G नेटवर्क और 4G नेटवर्क में क्या अंतर है?


5G और 4G नेटवर्क में कई महत्वपूर्ण अंतर हैं। यहां कुछ मुख्य अंतर दिए जा रहे हैं:


1. गति (Speed):


4G: चरम डेटा गति 1 जीबीपीएस (Gbps) तक हो सकती है।

5G: 5G नेटवर्क की चरम डेटा गति 20 जीबीपीएस (Gbps) तक हो सकती है, जिससे अधिक डेटा तेजी से साझा किया जा सकता है।

2. लैटेंसी (Latency):


4G: लैटेंसी आमतौर पर 30 मिलीसेकंड (ms) तक होती है।

5G: 5G नेटवर्क की लैटेंसी 1 मिलीसेकंड (ms) तक कम हो सकती है, जिससे विशेषज्ञता की गति बढ़ती है, जैसे कि वर्चुअल रिऐलिटी और गेमिंग के लिए।

3. कनेक्टेड डिवाइसेस:


4G: 4G नेटवर्क लगभग 1 लाख डिवाइसेस को एक साथ कनेक्ट कर सकता है।

5G: 5G नेटवर्क एक वर्ग किलोमीटर में 1 मिलियन से अधिक डिवाइसेस को कनेक्ट कर सकता है, जिससे भारी उपयोग वाले क्षेत्रों में भी अच्छी कनेक्टिविटी बनी रहती है।

4. डेटा कैपेसिटी:


4G: 4G नेटवर्क की डेटा कैपेसिटी सीमित हो सकती है, जिसका परिणाम हो सकता है कि भारी उपयोग के क्षेत्रों में डेटा संचार में संकट हो।

5G: 5G नेटवर्क की अधिक डेटा कैपेसिटी होती है, जिससे अधिक उपयोग के क्षेत्रों में भी सुचारू डेटा संचार हो सकता है।

5. उपयोग क्षेत्र:


4G: 4G अधिकतर मोबाइल डेटा संचार के लिए उपयोग होता है।

5G: 5G नेटवर्क को इंटरनेट ऑफ़ थिंग्स (IoT), विशेषज्ञता, उच्च गति वाले डेटा संचार, और नई तकनीकी उपयोगों के लिए डिज़ाइन किया गया है।

ये अंतर बताते हैं कि 5G नेटवर्क 4G से तेज, उच्च गति, और बेहतर सुविधाएँ प्रदान करने के लिए डिज़ाइन किया गया है।


मोबाइल में सार वैल्यू का क्या महत्त्व है?

"सार वैल्यू" शब्द सार्वजनिक सेतेलाइट सेवा (GPS) टेक्नोलॉजी के साथ जुड़ा होता है और यह आपके मोबाइल डिवाइस की जगह की जानकारी प्रदान करने में मदद करता है। "सार वैल्यू" का अर्थ होता है "सत्तारू से आई हुई ज्ञान"। यह स्थानांतर सेवाओं, नक्शा एप्लिकेशन, स्थान आधारित सेवाएं, और गेम्स के लिए महत्त्वपूर्ण है। निम्नलिखित कुछ क्षेत्रों में सार वैल्यू का महत्त्व है:


नेविगेशन: 

सार वैल्यू आपके मोबाइल डिवाइस को बिना किसी तकनीकी प्रबंधन के अगले स्थान की जानकारी प्रदान करने में मदद करता है। इससे नेविगेशन एप्लिकेशन्स, यात्रा और यातायात में सुधार होता है।


स्थानांतर सेवाएं: 

यह अन्य स्थानांतर सेवाओं को सुधारता है, जैसे कि लोकल खोज, रेस्तरां खोज, यात्रा सूचना, और औरों के साथ स्थान साझा करना।


गेम्स: 

कुछ गेम्स भी सार वैल्यू का उपयोग करके आपके वातावरण को जानते हैं और आपको वास्तविक दुनिया में हिला कर खेलने का अनुभव कराते हैं।


सुरक्षा: 

सार वैल्यू आपके स्थान की जानकारी का उपयोग सुरक्षा सेवाओं, लॉक एप्लिकेशन्स, और डेटा सुरक्षा के लिए भी करता है।


व्यापार और मार्गदर्शन:

 व्यवसायों में सार वैल्यू विपणी और उपभोक्ता के बीच संवाद को सुधार सकता है, और स्थानांतर विपणी को अच्छी तकनीकी सहायता प्रदान कर सकता है।


सार वैल्यू का उपयोग कई उद्देश्यों के लिए होता है और यह तकनीकी और सामाजिक अनुभवों को सुधारने में मदद करता है।


लेख@अम्बिका_राही 

धन्यवाद!

Thursday, November 9, 2023

Mouse के कितने प्रकार है विस्तार में समझाइए | Keyboard के कितने प्रकार है विस्तार में समझाइए | Display के कितने प्रकार है विस्तार में समझाइए Mobile Display के कितने प्रकार है? विस्तार में समझाइए?

November 09, 2023 0 Comments

 Mouse के कितने प्रकार है? विस्तार में समझाइए?


माउस कई प्रकार के हो सकते हैं, जो उपयोगकर्ता की आवश्यकताओं और पसंदों के आधार पर भिन्न हो सकते हैं। यहां कुछ सामान्य प्रकार की माउसों का वर्णन है:


मैकेनिकल माउस: 

ये पारंपरिक माउस हैं जो अंदर एक गोली का इस्तेमाल करते हैं ताकि वे चलन की जानकारी प्राप्त कर सकें। हालांकि, ये अब अधिकतर नई तकनीकों द्वारा प्रतिस्थापित हो गए हैं।


ऑप्टिकल माउस: 

ये माउस आंशिक चलन की जानकारी प्राप्त करने के लिए LED लाइट का उपयोग करते हैं। ये मैकेनिकल माउसों से अधिक सटीक हैं और जो होने वाली हवा में हिचकिचाहट के बिना काम कर सकते हैं।


लेजर माउस: 

ऑप्टिकल माउस के समान हैं, लेकिन इनमें और अधिक सटीकता के लिए लेजर तकनीक का उपयोग होता है। इन्हें विभिन्न परिस्थितियों में काम करने की क्षमता होती है।


वायरलेस माउस: 

ये माउस कंप्यूटर से रेडियो फ़्रीक्वेंसी (RF) या ब्लूटूथ तकनीक का उपयोग करके कनेक्ट करते हैं, जिससे एक शारीरिक केबल की आवश्यकता को समाप्त करते हैं। इनमें आमतौर पर बैटरी का उपयोग होता है।


वायर्ड माउस:

 ये माउस एक USB या PS/2 केबल के माध्यम से कंप्यूटर से कनेक्ट होते हैं। इन्हें बैटरी की आवश्यकता नहीं होती है, लेकिन उनकी चलने की क्षमता में सीमा हो सकती है।


गेमिंग माउस:

 ये विशेष रूप से गेमिंग के लिए डिज़ाइन किए गए होते हैं, जो अतिरिक्त फ़ीचर्स जैसे कि प्रोग्रामेबल बटन्स, समर्थन की समीक्षा, और अनुकूलन के लिए जाने जाते हैं।


ट्रैकबॉल माउस:

 इनमें पूरे माउस को हिलाने की बजाय उपयोगकर्ता अपनी अंगुली या उंगलियों से एक गोली को घुमाता है ताकि कर्सर को नियंत्रित किया जा सके। इससे कुछ उपयोगकर्ताओं के लिए यह अधिक सुखद हो सकता है।


टचपैड माउस: 

लैपटॉप्स में इनको तथ्यसूची माउस कहा जाता है, ये एक स्पष्ट सतह हैं जिनका उपयोग उपयोगकर्ता अपनी उंगलियों के साथ कर्सर को नियंत्रित करने के लिए कर सकता है।


एयर माउस या जायरोस्कोपिक माउस:

 इनमें गति सेंसर्स का उपयोग उड़ान को जानकारी प्राप्त करने के लिए होता है। इन्हें प्रस्तुतिकरण या मीडिया केंद्रों के लिए रिमोट कंट्रोल के रूप में अक्सर इस्तेमाल किया जाता है।


3D माउस: 

ये विशेष रूप से तीन-आयामी डिज़ाइन एप्लिकेशन के लिए इस्तेमाल होते हैं। इनमें आमतौर पर 3D अवस्थान में वस्तुओं को स्वाभाविक रूप से परिवर्तित करने की लिए डिज़ाइन किया गया है।



Keyboard के कितने प्रकार है? विस्तार में समझाइए?


कीबोर्ड कई प्रकार के हो सकते हैं, जो उपयोगकर्ता की आवश्यकताओं, उद्देश्यों और प्राथमिकताओं पर आधारित हो सकते हैं। यहां कुछ सामान्य प्रकार की कीबोर्ड हैं:


QWERTY कीबोर्ड: 

यह सबसे सामान्य और प्रसार की गई कीबोर्ड लेआउट है और इसे उपयोगकर्ताओं की अधिकांशत: अंग्रेजी भाषा में उपयोग किया जाता है।


ड्वोराक कीबोर्ड: 

ड्वोराक कीबोर्ड एक विकसित लेआउट है जिसने अनुक्रमणिका स्वरुप को सुधारा है, जिससे श्रेष्ठ गति और उच्चतम कुशलता हासिल हो सकती है।


मल्टीमीडिया कीबोर्ड: 

यह कीबोर्ड विशेष रूप से मल्टीमीडिया उपयोग के लिए डिज़ाइन किया जाता है और इसमें मीडिया संगीत, वीडियो चलाने और अन्य मल्टीमीडिया कार्यों के लिए विशेष बटन होते हैं।


गेमिंग कीबोर्ड: 

ये कीबोर्ड खेलने के लिए डिज़ाइन किए जाते हैं और इनमें अधिकतम प्रोग्रामेबल कुंजी, बैकलिट कुंजी, और उच्च संवेदनशीलता हो सकती है।


आंतरराष्ट्रीय कीबोर्ड:

 इनमें विभिन्न भाषाओं और समर्थन के लिए अक्षर होते हैं, जिससे विभिन्न भाषाओं में टाइप करना संभव होता है।


टचस्क्रीन कीबोर्ड: 

ये कीबोर्ड एक स्पष्ट स्क्रीन पर दिखाई जाने वाले बटनों का उपयोग करते हैं, जिससे टचस्क्रीन उपयोगकर्ताओं को एक स्थान से दूसरे स्थान पर नेविगेट करने की अनुमति देता है।


आईरॉल्ड कीबोर्ड: 

यह कीबोर्ड वायरलेस तकनीक का उपयोग करता है और इसमें एक आईरॉल्ड बैल मोजूद होता है जो एक इंफ्रारेड सेंसर के साथ काम करता है। उपयोगकर्ता बिना कोई भी संपर्क के साथ बैल को हिला सकता है, जिससे उपयोगकर्ता कर्सर को नियंत्रित कर सकता है।


इर्गोनॉमिक कीबोर्ड: 

इनमें डिज़ाइन ऐसा होता है जो उपयोगकर्ता के शरीर की स्वाभाविक रूप से सही दिशा में समर्थन करता है, जिससे उपयोगकर्ता को उच्चतम आराम होता है और उनकी चुस्ती बनी रहती है।


मेकेनिकल कीबोर्ड: 

इसमें हर बटन के नीचे मेकेनिकल स्विच होता है जिससे उच्च टाइपिंग की अनुभूति होती है और इसका उपयोग खिलाड़ियों और टाइपिस्ट्स द्वारा किया जा सकता है।


स्लाइड आउट कीबोर्ड:

ये कीबोर्ड सामान्यत: पॉकेट या टैबलेट के साथ यात्रा करने के लिए डिज़ाइन किए गए होते हैं और इन्हें बाहर निकालकर उपयोग किया जा सकता है।


Display के कितने प्रकार है? विस्तार में समझाइए?


डिस्प्ले (या मॉनिटर) कई प्रकार के हो सकते हैं, जो विभिन्न उपयोगों, तकनीकी विशेषताओं, और प्राथमिकताओं के आधार पर विभिन्न हो सकते हैं। यहां कुछ सामान्य प्रकार के डिस्प्ले हैं:


LCD (Liquid Crystal Display):

 ये सबसे सामान्य प्रकार के डिस्प्ले हैं और उन्हें विभिन्न आकारों और रिज़ोल्यूशन्स में उपलब्ध किया जाता है।


LED (Light Emitting Diode) Display:

 इनमें LED प्रकाश स्रोत के रूप में उपयोग होता है जो उन्हें और भी पत्थरीवर्ती बनाता है और जो सामान्यत: बेहतर रंग प्रदर्शन क्षमता और ऊर्जा की बचत प्रदान करता है।


OLED (Organic Light Emitting Diode) Display:

 ये डिस्प्ले ऑर्गेनिक सामग्रियों का उपयोग करके प्रकाश पैदा करते हैं, जिससे बेहतर रंग, कम विद्युत दोरी, और और भी पत्थरीवर्ती बनाते हैं।


Plasma Display:

 यह डिस्प्ले बड़े आकार के मॉनिटरों और टेलीविजनों के लिए आम हैं, और इनमें गैस प्लाज़्म द्वारा पैदा किए जाने वाले इलेक्ट्रॉन्स के विकसित होते हैं।


CRT (Cathode Ray Tube) Display:

 ये पुरानी तकनीक हैं, लेकिन कुछ ओर स्थानों पर आज भी इसका उपयोग होता है। इनमें एक इलेक्ट्रॉन बीम का उपयोग किया जाता है जो एक चित्र को तैयार करता है।


3D Display:

 ये डिस्प्ले तीन-आयामी गतिविधियों के लिए डिज़ाइन किए जाते हैं और उपयोगकर्ताओं को तीन-आयामी गतिविधियों का आनंद लेने का अनुमति देते हैं।


Curved Display:

 इनमें आर्क की आकृति होती है जो दृश्य को एक बेहतर तरीके से देखने के लिए बनाती है, विशेषत: गेमिंग और व्यापक दृश्य सुधार के लिए।


Touchscreen Display:

 इनमें स्क्रीन पर छूने की क्षमता होती है, जिससे उपयोगकर्ता सीधे स्क्रीन पर टैप करके किसी ऑब्जेक्ट को चुन सकता है।


HDR (High Dynamic Range) Display:

 ये डिस्प्ले बेहतर रंग, तेजी से परिवर्तन की क्षमता, और अधिक चित्र क्षमता के साथ आते हैं।


E-ink Display:

 इस प्रकार के डिस्प्ले इंक का उपयोग करते हैं जिससे चित्र बनाने के लिए विद्युत दोरी की जरुरत नहीं होती है और जो बहुत अच्छे प्रकाश पैदा करते हैं और जिन्हें समर्थन के लिए कम ऊर्जा की आवश्यकता है।


बाजार में और भी कई तरीके के डिस्प्ले उपलब्ध है जिसको आप अपनी जरुरत के हिसाब से उसको कस्टमाइज कर सकते है |

Mobile Display के कितने प्रकार है? विस्तार में समझाइए?


मोबाइल डिस्प्ले भी विभिन्न प्रकारों में उपलब्ध हो सकते हैं, जो विभिन्न तकनीकी विशेषताओं और उपयोग के लिए डिज़ाइन किए जाते हैं। यहां कुछ सामान्य मोबाइल डिस्प्ले के प्रकार हैं:


LCD (Liquid Crystal Display):

 सबसे सामान्य प्रकार के मोबाइल डिस्प्ले में एक परत ऊर्जा के साथ रोशनी को नियंत्रित करती है।


OLED (Organic Light Emitting Diode) Display: 

इनमें ऑर्गेनिक सामग्रियों का उपयोग किया जाता है जो इलेक्ट्रिक विद्युत स्रोत के साथ प्रकाश उत्पन्न करती हैं।


AMOLED (Active Matrix Organic Light Emitting Diode) Display:

 ये OLED डिस्प्ले के एक प्रकार हैं जिसमें प्रत्येक पिक्सल को स्वयं से संचालित करने के लिए एक एक्टिव मैट्रिक्स होती है।


Super AMOLED Display: 

इसमें डिस्प्ले की स्क्रीन और टच सेंसिटिविटी को एक ही लेयर में शामिल किया जाता है, जिससे प्रदर्शन और छूने की अधिक स्पष्टता होती है।


Retina Display: 

यह आईफोनों में उपयोग होने वाला एक प्रकार का डिस्प्ले है जिसमें पिक्सल इतने छोटे होते हैं कि वे अदृश्य होते हैं, और उपयोगकर्ता को एक सुपर क्लियर छवि मिलती है।


IPS (In-Plane Switching) Display: 

इसमें बेहतर दृश्यकोण और रंग स्थिरता होती है, और यह विभिन्न दिशाओं से भी अच्छा दृश्य प्रदान करता है।


TFT (Thin Film Transistor) Display: 

इसमें प्रत्येक पिक्सल को नियंत्रित करने के लिए ट्रांजिस्टर का उपयोग किया जाता है, जिससे उच्च गुणवत्ता और तेज़ प्रतिक्रिया मिलती है।


HDR (High Dynamic Range) Display:

ये डिस्प्ले बेहतर रंग, तेजी से परिवर्तन की क्षमता, और और भी पत्थरीवर्ती बनाते हैं।


Notch Display: 

इसमें स्क्रीन के एक कोने में एक नॉच होता है, जिसमें फ्रंट कैमरा और सेंसर्स शामिल होते हैं।


Foldable Display: 

इसमें डिस्प्ले को विभिन्न रूपों में विकसित किया जा सकता है ताकि उपयोगकर्ता एक छोटे साइज़ के डिवाइस का उपयोग कर सके और फिर बड़े साइज़ का डिस्प्ले का आनंद ले सके।


ये उदाहरण हैं और विकसित हो रही नई तकनीकों के साथ नए प्रकार के मोबाइल डिस्प्ले भी आ रहे हैं।

Poem Gazal Shayari

लेख@अम्बिका_राही

Sunday, October 8, 2023

संगीत क्या है ? और इसके घटक पर प्रकाश डालिए ?

October 08, 2023 0 Comments

 संगीत क्या है ? और इसके घटक पर प्रकाश डालिए ?


संगीत एक श्रृंगारिक कला है जिसमें ध्वनि, लय, मेलोडी, और रचना का संगम होता है। इसके माध्यम से व्यक्ति अपने भावनाओं, विचारों, और अभिवादनों को अद्वितीय तरीके से अभिव्यक्ति कर सकते हैं। संगीत का महत्व लोगों के जीवन में बहुत अधिक होता है, और यह सामाजिक, सांस्कृतिक, और व्यक्तिगत स्तर पर समृद्धि और आनंद प्रदान करता है।


संगीत के मुख्य घटक:


ध्वनि (Sound): 

संगीत का प्रमुख घटक ध्वनि होता है। यह म्यूजिकल नोट्स के रूप में सुनाई देता है, जो विभिन्न संगीतलिय उपकरणों द्वारा उत्पन्न किए जाते हैं।


लय (Rhythm): 

लय संगीत की ताल को परिभाषित करता है। यह ध्वनिक पट्टियों की मात्राओं और अवधियों के बारे में होता है जो संगीत के बीतने के प्रवृत्ति को दर्शाता है।


मेलोडी (Melody): 

मेलोडी संगीत का मानोबल या मुख्य गाना होता है। यह संगीत की रचना में विभागित नोटों की एक सिरजना होती है, जिसमें एक अंतरिक्ष तथा समय का पालन किया जाता है।


ध्वनिक उपकरण (Musical Instruments):

 संगीत का गायन और बजाने के लिए विभिन्न ध्वनिक उपकरण होते हैं, जैसे कि वाद्ययंत्र, पर्कशी उपकरण, तबला, गिटार, और ढोलक।


रचना (Composition):

 संगीत की रचना गीतकारों, संगीतकारों, और वादकों के द्वारा की जाती है। यह ध्वनियों, लय, और मेलोडी को मिलाकर एक संगीत प्रस्तुति बनाने की कला होती है।


भावना (Expression):

 संगीत के माध्यम से कला करने वाले कलाकार अपनी भावनाओं और भावनाओं को अभिव्यक्त करने का एक उपकरण पाते हैं। संगीत के माध्यम से कला करने वाले कलाकार अपने दर्शकों को गहरे रूप से प्रभावित कर सकते हैं।


राग संगीत का महत्वपूर्ण और मूल तत्व है, जिसे ध्वनि का सुंदर और व्यक्तिगत संगठन माना जाता है। यह एक पाठ्यक्रमिक और भावनात्मक प्रयास होता है, जिसका मुख्य उद्देश्य एक संगीत प्रदर्शन को रूपित करना है जिसमें ध्वनि की सुखद और सहयोगी संघटन होती है।


राग के मुख्य घटक:


स्वर (Notes): 

राग में स्वर होते हैं, जिन्हें विशेष सीख और अभ्यास के बाद गाने जाते हैं। स्वर ध्वनियों के विशेष ढंग से कार्य करते हैं, और वे श्रुति (स्वर के ऊंचाई) और स्थायी (स्थिति) के साथ मेल खाते हैं।


स्वरस्तान (Scale):

 राग में एक विशिष्ट स्वरस्तान या स्केल होता है, जिसमें स्वरों की क्रमबद्ध सीख और उपयोग होता है। स्वरस्तान राग की पहचान में महत्वपूर्ण होता है और विभिन्न रागों को विभाजित करने में मदद करता है।


आलाप (Alap): 

यह एक प्रारंभिक चरण होता है जिसमें संगीतकार राग के स्वरों को स्वतंत्रता से गाते हैं, बिना ताल के। इसमें राग की विशेषता और भावना को प्रकट किया जाता है।


जोड़ (Jor):

 इस चरण में, संगीतकार धीरे-धीरे ताल को जोड़ते हैं और स्वरों की रचना को बढ़ाते हैं।


गति (Gat): 

गति चरण में ताल का पूरा प्रयोग होता है, और यहाँ पर ताल में स्वरों की तथा ताल की साझा में कार्य करते हैं।


तान (Tan): 

तान चरण में, संगीतकार स्वरों के तानों का प्रयोग करते हैं, जिनमें ध्वनि की उच्च और मध्य स्थिति का उपयोग होता है।


ताल (Rhythm): 

ताल राग के अधिक अंग में होती है, जिसमें एक निश्चित संख्या में मात्राओं का गणना किया जाता है। ताल संगीत की विशेषता होती है, और यह संगीत के रहने का प्रवृत्ति को प्रभावित करती है।


राग का अभ्यास कैसे करें ? 

राग का अभ्यास करना संगीत में एक महत्वपूर्ण प्रक्रिया है, जिसमें स्वर, ताल, और भावना की अच्छी तरह से समझाव और विशेषगत शृंगारिकता की आवश्यकता होती है। यहां कुछ सुझाव दिए गए हैं जो राग का अभ्यास करने में मदद कर सकते हैं:


एक गुरु या शिक्षक से सिखें: 

राग संगीत का अधिकतर अभ्यास एक अनुभवी गुरु या शिक्षक के साथ किया जाता है। वे सही तरीके से स्वरों को गाने का और राग की विशेषताओं को समझने का मार्गदर्शन कर सकते हैं।


संगीत पाठशाला या संगीत इंस्टीट्यूट में दाखिल हों: 


यदि आपके पास एक संगीत पाठशाला या संगीत इंस्टीट्यूट है, तो वहां पंचांग विद्यालय के तहत राग का अभ्यास कर सकते हैं।


रियाज़ करें: 

राग का अभ्यास नियमित रूप से करने की आदत डालें। ध्यानपूर्वक और नियमित अभ्यास स्वरों को स्थायी रूप से याद करने में मदद करेगा।


राग की थीम समझें:

 हर राग की अपनी विशेष थीम होती है, जैसे कि ऋषभान्तर गांधारी या भैरवी आदि। राग की थीम को समझकर उसके रंग और भावना को व्यक्त करने में मदद मिलेगी।


संगीतकारों का सुनवाई करें:

 प्रमुख संगीतकारों के प्रस्तुतियों को सुनें और उनकी गायन तकनीक और राग का अभ्यास करें।


संगीत साधना: 

राग संगीत की साधना एक मनोबल और आध्यात्मिक प्रक्रिया होती है। इसे ध्यान और ध्यान के साथ करें और राग के मूल स्वरों की मानसिकता को समझें।


संगीत प्रदर्शन करें: 

राग के अभ्यास का हिस्सा यह भी होता है कि आप लाइव प्रदर्शन करें, जिससे आपका स्वरों को प्रदर्शन करने का अवसर मिलता है और आप अपनी प्रगति को माप सकते हैं।


धन्यवाद!

लेख@अम्बिका_राही 

PF क्या है ? पीएफ में फॉर्म 31 क्या है? फार्म 19 क्या है? फार्म 10c क्या है?

Key Content: PF क्या है ?  पीएफ में फॉर्म 31 क्या है? फार्म 19 क्या है? फार्म 10c क्या है?  PF क्या है ईपीएफओ का पूरा नाम एम्पलाई प्रोविडेंट...