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प्यार आपका मुझे जीना सिखा दिया | प्यार की कविता | अम्बिका "राही" | Love Feelings Poems

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 प्यार आपका मुझे जीना सिखा दिया | यूँ तो मौज में, "राही", चलते रहे हम, लड़खड़ाकर मंजिल चढ़ते रहे हम, न खोने का डर, न किसी मंजिल की जकड़, स्वछन्द मन की पुकार सुनते रहे हम, आपकी आँखों ने शरमाना सिखा दिया, प्यार आपका मुझे जीना सिखा दिया | किस्से सुने थे कई, बेपनाह मुहोब्बत के, हीर-राँझा, देवी राधा, देवी मीरा के समर्पण के, हम भी उसी नक्से, कदम पर चलने वाले थे, तलाश कर, खुद को समर्पित करने वाले थे, मौत से भी, न डरा जिसने उसे डरना सिखा दिया, प्यार आपका मुझे जीना सिखा दिया | अब से सावन में झुला झूले हम, मुस्कान देखकर हर दर्द भूले हम, दोनों का प्यारा जिसे गोदी में लेकर, प्यार से घुमाये, गालों को चूमे हम, जितना भी जी लूँ साथ तेरे जैसे कम ही लगता है, चंचल मन को तेरी बाँहों ने ठहरना सिखा दिया, प्यार आपका मुझे जीना सिखा दिया |  कविता: अम्बिका "राही"

तुझे जब भी गले लगाया, खुद को शून्य पाया हूँ | Ambika Rahee | अम्बिका राही

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 तुझे जब भी गले लगाया, खुद को शून्य पाया हूँ | Ambika Rahee | अम्बिका राही तुझे जब भी गले लगाया, खुद को शून्य पाया हूँ  | एक नजर ही देखा, लगा ठहर सा गया हूँ, खुद को भूलकर तुझमें, खो सा गया हूँ, हां याद है, ए सिलसिला कई महीनो चला था, तुम मुस्कराती तो लगता, रिश्ता कई जन्मो से जुड़ा है , ए बातें याद करके  ख़ुद को ख़ुश पाया हूँ, तुझे जब भी गले लगाया, खुद को शून्य पाया हूँ  | तुम आज भी न बदले न बदला प्यार तुम्हारा, मुहब्बत हुई जबसे, संसार लगता है अपना सारा, समर्पित है तुझको, मेरा हर गुनगुनाना, तू मुस्कुरा दे तो समझूँ मिल गया है खजाना, तुम को पाया तो जैसे ख़ुदा पाया हूँ, तुझे जब भी गले लगाया, खुद को शून्य पाया हूँ  | -अम्बिका "राही" www.poemgazalshayari.in हमारे इस पोस्ट को पढ़ने के लिए हम आपका आभार व्यक्त करते है | इस जानकारी को ज्यादा से ज्यादा Facebook, Whatsapp जैसे सोशल मिडिया पर जरूर शेयर करें | धन्यवाद  !!! www.poemgazalshayari.in