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Thursday, February 11, 2021

निदा फाज़ली का जीवन परिचय | Nida Fazali Biography in Hindi

 निदा फाज़ली का जीवन परिचय | Nida Fazali Biography in Hindi


आपका पूरा नाम मुक्तदा हसन निदा फ़ाज़ली है,  जन्म 12 अक्टूबर 1938 को दिल्ली में हुआ। 

आपके पिताजी मुर्तजा हसन और माताजी जमील फातिमा के आप तीसरी संतान है |

'निदा' स्वर को कहा जाता है और  फ़ाज़िला क़श्मीर के एक इलाके का नाम है जहाँ से आप के पूर्वज दिल्ली रहने लगे थे , आप को कश्मीर बहुत अच्छा लगता था, कश्मीर से जुडाव बना रहे इसलिए आपने अपने नाम में फाजली शीर्षक को जोड़ दिए | 


आपका बचपन ग्वालियर में गुजरा | १९५८ में ग्वालियर कॉलेज से आपने स्नातकोत्तर की शिक्षा पूरी की | 


बहुत पुरानी कहावत है कि हर कामयाब पुरुष के पीछे महिला का हाँथ होता है, यह बात कही न कहीं आप के जीवन पर भी असर करती है,

आप के पिताजी भी शायर थे, और जब आप स्कूल के दिनों में थे आपके सामने एक लड़की बैठती थी, आप उससे मन ही मन बहुत प्यार करते थे, लेकिन ये आपकी एकतरफा मुहोब्बत थी, उस समय आप सिर्फ उसके लिए लिखा करते थे,

बाद में उसका एक रोड एक्सीडेंट में मौत हो जाने के कारण, आप का प्यार दर्द बनकर शायरी में उभरने लगा, (आप उस इन्सान को भूल सकते हो जिससे आपको नफ़रत हो जाये, लेकिन जो आपके दिल में है उससे आप दूर रहकर टूट जावोगे), उस समय क्योकि आपका बाल्यकाल था तो इतना अच्छा आप नहीं लिख पाते थे |

 इसलिए अपने सूरदास,कबीर, तुलसीदास और बाबा फ़रीद. जैसे बड़े रचनाकारों का गहनता से अध्ययन किया और अपने छमता से आधार पर अपने इतने सरल शब्दों में गीत लिखे जो विश्व प्रसिध्द हो गए, मेरा ये दावा है इस पोस्ट को पढ़ने वाला हर शख्स कभी किसी को मुकम्मल जहाँ नहीं मिलता और तू इस तरह से जिंदगी में सामिल है जैसे गीत जरुर गाये होंगे | 


फिल्म ‘आहिस्ता-आहिस्ता' के लिए निदा फ़ाज़ली ने 'कभी किसी को मुक्कमल जहां नहीं मिलता गीत लिखा। आशा भोसले और भूपिंदर सिंह की आवाज़ में, इतना सराहा गया की  ग़ज़ल प्रेमियों की जुबान पर आज भी गुजती रहती है |


प्रसिद्ध गजल गायक जगजीत सिंह ने आपके कई गीत गाए,  फिल्म सरफरोश का गीत 'होश वालो को खबर क्या बेखुदी क्या चीज है' यह ग़ज़ल इतना फेमस हुआ की आज भी लोगों को ग़ज़ल गुनगुनाते हुए सुन सकते है  ।

‘खोया हुआ सा कुछ' आपकी शायरी का एक  महत्वपूर्ण संग्रह है। आपकी इस कृति को साहित्य अकादमी पुरस्कार दिया गया था। आपके इस ग़ज़ल संग्रह में आपके दोहे भी बहुत कुछ सिखाते है | 


हिंदी-उर्दू काव्य प्रेमियों के बीच समान रूप से लोकप्रिय और सम्मानित 'निदा फ़ाज़ली' आपकी रचनाये पूरी दुनिया में हमेशा अमर रहेंगी |


8 फरवरी 2016 को मुंबई में 83 वर्ष की आयु में आप इस दुनिया से विदा ले लिए |


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