प्रिय पाठकों! हमारा उद्देश्य आपके लिए किसी भी पाठ्य को सरलतम रूप देकर प्रस्तुत करना है, हम इसको बेहतर बनाने पर कार्य कर रहे है, हम आपके धैर्य की प्रशंसा करते है| मुक्त ज्ञानकोष, वेब स्रोतों और उन सभी पाठ्य पुस्तकों का मैं धन्यवाद देना चाहता हूँ, जहाँ से जानकारी प्राप्त कर इस लेख को लिखने में सहायता हुई है | धन्यवाद!

Tuesday, October 27, 2020

ज़ुबाँ को बन्द करें या मुझे असीर करें - zubaan ko band karen ya mujhe aseer karen - बृज नारायण चकबस्त - brij naaraayan chakabast

 ज़ुबाँ को बन्द करें या मुझे असीर करें

मेरे ख़याल को बेड़ी पिन्हा नहीं सकते ।


ये कैसी बज़्म है और कैसे इसके साक़ी हैं

शराब हाथ में है और पिला नहीं सकते ।


ये बेकसी भी अजब बेकसी है दुनिया में

कोई सताए हमें हम सता नहीं सकते ।


कशिश वफ़ा की उन्हें खींच लाई आख़िरकार

ये था रक़ीब को दावा वे आ नहीं सकते ।


जो तू कहे तो शिकायत का ज़िक्र कम कर दें

मगर यक़ीं तेरे वादों पै ला नहीं सकते ।


चिराग़ क़ौम का रोशन है अर्श पर दिल के

इसे हवा के फ़रिश्ते बुझा नहीं सकते ।


बृज नारायण चकबस्त - brij naaraayan chakabast


No comments:

Post a Comment

इंटरनेट क्या है? इंटरनेट पर लॉगिन क्यों किया जाता है? वेबसाइट क्या है| थर्ड पार्टी एक्सेस क्या है? फेसबुक के थर्ड पार्टी ऐप को कैसे हटाए?

 इंटरनेट क्या है?  इंटरनेट पर लॉगिन क्यों किया जाता है?   वेबसाइट क्या है|  थर्ड पार्टी एक्सेस क्या है? फेसबुक के थर्ड पार्टी ऐप को कैसे हटा...