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Thursday, June 18, 2020

उँगली में पोर-पोर नाधे सुख-दुख - ungalee mein por-por naadhe sukh-dukh -- जयप्रकाश त्रिपाठी- Jayprakash Tripathi #www.poemgazalshayari.in ||Poem|Gazal|Shaayari|Hindi Kavita|Shayari|Love||

उँगली में पोर-पोर नाधे सुख-दुख।
बित्ताभर जीवन के रोज़ नए रुख।

खोज-खोज राह थके, ठाँव-ठौर गुम,
कोई कहे चलता चल, कोई कहे रुक।

चूल्हा-चक्की लादे डगर-मगर पाँव,
आएँ-नहीं-जाएँ प्राण करें धुक-धुक।

सीना ताने क्यों, फैले दोनो हाथ,
चाहे तो रीढ़ बिना और जरा झुक।

सौ-सौ अनर्थ लिए एक-एक अर्थ,
तितर-बितर शब्द हुए, मिलें नहीं तुक।


- जयप्रकाश त्रिपाठी- Jayprakash Tripathi

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