प्रिय पाठकों! हमारा उद्देश्य आपके लिए किसी भी पाठ्य को सरलतम रूप देकर प्रस्तुत करना है, हम इसको बेहतर बनाने पर कार्य कर रहे है, हम आपके धैर्य की प्रशंसा करते है| धन्यवाद!

Sunday, April 12, 2020

बन में वीराँ थी नजर शहर मे दिल रोता है - ban mein veeraan thee najar shahar me dil rota hai -गुलाम मोहम्मद क़ासिर - Ghulam Mohammad Kasir #poemgazalshayari.in

बन में वीराँ थी नजर शहर मे दिल रोता है
जिंदगी से ये मेरा दूसरा समझौता है

लहलहाते हुए ख्वाबों से मेरी आँखों तक
रत-जगे काश्त न कर ले तो वो कब सोता है

जिस को इस फस्ल में होना है बराबर का शरीक
मेरे एहसास में तन्हाइयाँ क्यूँ बोता है

नाम लिख लिख के तेरा फूल बनाने वाला
आज फिर शबनमीं आँखों से वरक धोता है

तेरे बख्शे हुए इक गम का करिश्मा है कि अब
जो भी गम हो मेरे मेयार से कम होता है

सो गए शहर-ए-मोहब्बत के सभी दाग ओ चराग
एक साया पस-ए-दीवार अभी रोता है

ये भी इक रंग है शायद मेरी महरूमी का
कोई हँस दे तो मोहब्बत गुमाँ होता है

गुलाम मोहम्मद क़ासिर - Ghulam Mohammad Kasir

#poemgazalshayari.in

No comments:

Post a Comment

Teri Muhabbat ne sikhaya, mujhe bharosha karna | Love Shyaari | Pyar shyari | shayari with image | couple shayari

 Teri Muhabbat ne sikhaya, mujhe bharosha karna, warna ek sa samjh sabko, gunah kar baitha tha. -Ambika Rahee हमारे इस पोस्ट को पढ़ने के लिए ...