प्रिय पाठकों! हमारा उद्देश्य आपके लिए किसी भी पाठ्य को सरलतम रूप देकर प्रस्तुत करना है, हम इसको बेहतर बनाने पर कार्य कर रहे है, हम आपके धैर्य की प्रशंसा करते है| धन्यवाद!

Wednesday, March 11, 2020

सन्ध्या की किरण परी ने उठ अरुण पंख दो खोले - sandhya kee kiran paree ne uth arun pankh do khole -sachchidanand hiranand vatsyayan "agay"- सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन "अज्ञेय" #Poem Gazal Shayari



सन्ध्या की किरण परी ने उठ अरुण पंख दो खोले,
कम्पित-कर गिरि शिखरों के उर-छिपे रहस्य टटोले।
देखी उस अरुण किरण ने कुल पर्वत-माला श्यामल-
बस एक शृंग पर हिम का था कम्पित कंचन झलमल।

प्राणों में हाय, पुरानी क्यों कसक जग उठी सहसा?
वेदना-व्योम से मानो खोया-सा स्मृति-घन बरसा।
तेरी उस अन्त घड़ी में तेरी आँखों में जीवन!
ऐसा ही चमक उठा था तेरा अन्तिम आँसू-कण!

sachchidanand hiranand vatsyayan "agay"- सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन "अज्ञेय"

#Poem Gazal Shayari

No comments:

Post a Comment

Most Popular 5 Free Web Camera for windows | free WebCam for windows | Free Camera

Most Popular 5 Free Web Camera for windows | Free WebCam for windows | Free Camera 1. Logitech Capture  लोगिस्टिक कैप्चर विंडोज के कुछ वेब क...