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Thursday, March 12, 2020

दिल मेरा जिस से बहलता कोई ऐसा न मिला - dil mera jis se bahalata koee aisa na mila -अकबर इलाहाबादी - Akbar Allahabad Poem Gazal Shayari

दिल मेरा जिस से बहलता कोई ऐसा न मिला
बुत के बंदे तो मिले अल्लाह का बंदा न मिला

बज़्म-ए-याराँ से फिरी बाद-ए-बहारी मायूस
एक सर भी उसे आमादा-ए-सौदा न मिला

गुल के ख्व़ाहाँ तो नज़र आए बहुत इत्रफ़रोश
तालिब-ए-ज़मज़म-ए-बुलबुल-ए-शैदा न मिला

वाह क्या राह दिखाई हमें मुर्शिद ने
कर दिया काबे को गुम और कलीसा न मिला

सय्यद उठे तो गज़ट ले के तो लाखों लाए
शेख़ क़ुरान दिखाता फिरा पैसा न मिला


अकबर इलाहाबादी - Akbar Allahabad

Poem Gazal Shayari

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