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Monday, November 18, 2019

मैं लाख कह दूं कि आकाश हूं ज़मीं हूं मैं - main laakh kah doon ki aakaash hoon zameen hoon main - राहत इंदौरी - Rahat Indori

मैं लाख कह दूं कि आकाश हूं ज़मीं हूं मैं 
मगर उसे तो ख़बर है कि कुछ नहीं हूं मैं 

अजीब लोग हैं मेरी तलाश में मुझ को 
वहां पे ढूंढ रहे हैं जहां नहीं हूं मैं
मायूस...
मैं आईनों से तो मायूस लौट आया था 
मगर किसी ने बताया बहुत हसीं हूं मैं 

वो ज़र्रे ज़र्रे में मौजूद है मगर मैं भी 
कहीं कहीं हूं कहां हूं कहीं नहीं हूं मैं 

किताब...
वो इक किताब जो मंसूब तेरे नाम से है 
उसी किताब के अंदर कहीं कहीं हूं मैं 

सितारो आओ मिरी राह में बिखर जाओ 
ये मेरा हुक्म है हालांकि कुछ नहीं हूं मैं 

तलाश...
यहीं हुसैन भी गुज़रे यहीं यज़ीद भी था 
हज़ार रंग में डूबी हुई ज़मीं हूं मैं 

ये बूढ़ी क़ब्रें तुम्हें कुछ नहीं बताएंगी 
मुझे तलाश करो दोस्तो यहीं हूं मैं 

- राहत इंदौरी - Rahat Indori


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