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Sunday, October 13, 2019

ये कूचे ये नीलाम घर दिलकशी के - ye kooche ye neelaam ghar dilakashee ke - -साहिर लुधियानवी - saahir ludhiyaanavee

ये कूचे ये नीलाम घर दिलकशी के
ये लुटते हुए कारवां जिन्दगी के
कहाँ हैं, कहाँ हैं, मुहाफ़िज़ ख़ुदी के?

सनाख़्वान-ए-तकदीस-ए-मशरिक कहाँ हैं?

ये पुरपेंच गलियाँ, ये बेख़ाब बाज़ार
ये गुमनाम राही, ये सिक्कों की झंकार
ये इस्मत के सौदे, ये सौदों पे तकरार

सनाख़्वान-ए-तकदीस-ए-मशरिक कहाँ हैं?

तअफ्फ़ुन से पुर नीमरोशन ये गलियाँ
ये मसली हुई अधखिली ज़र्द कलियाँ
ये बिकती हुई खोखली रंगरलियाँ

सनाख़्वान-ए-तकदीस-ए-मशरिक कहाँ हैं?

वो उजले दरीचों में पायल की छन-छन
तनफ़्फ़ुस की उलझन पे तबले की धन-धन
ये बेरूह कमरों में खांसी की ठन-ठन

सनाख़्वान-ए-तकदीस-ए-मशरिक कहाँ हैं?

ये गूंजे हुए क़हक़हे रास्तों पर
ये चारों तरफ़ भीड़-सी खिड़िकयों पर
ये आवाज़ें खींचते हुए आंचलों पर

सनाख़्वान-ए-तकदीस-ए-मशरिक कहाँ हैं?

ये फूलों के गजरे, ये पीकों के छींटे
ये बेबाक नज़रें, ये गुस्ताख़ फ़िक़रे
ये ढलके बदन और ये मदक़ूक़ चेहरे

सनाख़्वान-ए-तकदीस-ए-मशरिक कहाँ हैं?

ये भूखी निगाहें हसीनों की जानिब
ये बढ़ते हुए हाथ सीनों की जानिब
लपकते हुए पांव ज़ीनों की जानिब

सनाख़्वान-ए-तकदीस-ए-मशरिक कहाँ हैं?

यहां पीर भी आ चुके हैं जवाँ भी
तनूमन्द बेटे भी, अब्बा मियां भी
ये बीवी भी है और बहन भी है, माँ भी

सनाख़्वान-ए-तकदीस-ए-मशरिक कहाँ हैं?

मदद चाहती है ये हव्वा की बेटी
यशोदा की हमजिन्स राधा की बेटी
पयम्बर की उम्मत ज़ुलैख़ा की बेटी

सनाख़्वान-ए-तकदीस-ए-मशरिक कहाँ हैं?

ज़रा मुल्क के राहबरों को बुलाओ
ये कूचे ये गलियां ये मन्ज़र दिखाओ
सनाख़्वान-ए-तकदीस-ए-मशरिक को लाओ

सनाख़्वान-ए-तकदीस-ए-मशरिक कहाँ हैं?


-साहिर लुधियानवी - saahir ludhiyaanavee

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