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Monday, June 22, 2020

वक़्त हो तो कोई सुने, जो मैं सुनाता रहा - vaqt ho to koee sune, jo main sunaata raha -- जयप्रकाश त्रिपाठी- Jayprakash Tripathi #www.poemgazalshayari.in ||Poem|Gazal|Shaayari|Hindi Kavita|Shayari|Love||

वक़्त हो तो कोई सुने, जो मैं सुनाता रहा।
कहर से लड़ते मुफ़लिसों के गीत गाता रहा।

मैं कौन होता हूँ, ख़ाली-उदास पन्नों पर,
रोज़ लिखता रहा जो, कोई सब मिटाता रहा।

कोई क़ीमत नहीं अब रह गई जज़्बातों की,
खुली-खुली बही रही, उधार खाता रहा।

शब्द जो पिघले बुरे वक़्त की सियाही से,
आँसुओं से उन्हें धो-धो के जगमगाता रहा।

आँख से टपके जो दो-चार बून्द, क्या होगा,
टूटती बारिशों से दरिया थरथराता रहा।

- जयप्रकाश त्रिपाठी- Jayprakash Tripathi

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