प्रिय पाठकों! हमारा उद्देश्य आपके लिए किसी भी पाठ्य को सरलतम रूप देकर प्रस्तुत करना है, हम इसको बेहतर बनाने पर कार्य कर रहे है, हम आपके धैर्य की प्रशंसा करते है| मुक्त ज्ञानकोष, वेब स्रोतों और उन सभी पाठ्य पुस्तकों का मैं धन्यवाद देना चाहता हूँ, जहाँ से जानकारी प्राप्त कर इस लेख को लिखने में सहायता हुई है | धन्यवाद!

Wednesday, June 17, 2020

अबिगत नाथ निरंजन देवा - abigat naath niranjan deva -- रैदास- Raidas #www.poemgazalshayari.in ||Poem|Gazal|Shaayari|Hindi Kavita|Shayari|Love||

अबिगत नाथ निरंजन देवा।
मैं का जांनूं तुम्हारी सेवा।। टेक।।
बांधू न बंधन छांऊँ न छाया, तुमहीं सेऊँ निरंजन राया।।१।।
चरन पताल सीस असमांना, सो ठाकुर कैसैं संपटि समांना।।२।।
सिव सनिकादिक अंत न पाया, खोजत ब्रह्मा जनम गवाया।।३।।
तोडूँ न पाती पूजौं न देवा, सहज समाधि करौं हरि सेवा।।४।।
नख प्रसेद जाकै सुरसुरी धारा, रोमावली अठारह भारा।।५।।
चारि बेद जाकै सुमृत सासा, भगति हेत गावै रैदासा।।६।।



- रैदास- Raidas

#www.poemgazalshayari.in

||Poem|Gazal|Shaayari|Hindi Kavita|Shayari|Love||

No comments:

Post a Comment