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Tuesday, March 10, 2020

ओ पिया, पानी बरसा ! - o piya, paanee barasa ! -sachchidanand hiranand vatsyayan "agay"- सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन "अज्ञेय" #Poem Gazal Shayari #Poem_Gazal_Shayari

ओ पिया, पानी बरसा !
घास हरी हुलसानी
मानिक के झूमर-सी झूमी मधुमालती
झर पड़े जीते पीत अमलतास
चातकी की वेदना बिरानी।
बादलों का हाशिया है आस-पास
बीच लिखी पाँत काली बिजली की
कूँजों के डार-- कि असाढ़ की निशानी !
ओ पिया, पानी !
मेरा हिया हरसा।
खड़-खड़ कर उठे पात, फड़क उठे गात।
देखने को आँखें, घेरने को बाँहें,
पुरानी कहानी !
ओठ को ओठ, वक्ष को वक्ष--
ओ पिया, पानी !
मेरा जिया तरसा।
ओ पिया, पानी बरसा।



sachchidanand hiranand vatsyayan "agay"- सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन "अज्ञेय"

#Poem Gazal Shayari

#Poem_Gazal_Shayari

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