मुस्लिम का मियाँपन सोख़्त करो, हिन्दू की भी ठकुराई न रहे! - muslim ka miyaanpan sokht karo, hindoo kee bhee thakuraee na rahe! -अकबर "इलाहाबादी" - Akbar "Allahabadi" Poem Gazal Shayari


मुस्लिम का मियाँपन सोख़्त करो, हिन्दू की भी ठकुराई न रहे!
बन जावो हर इक के बाप यहाँ दावे को कोई भाई न रहे!
हम आपके फ़न के गाहक हों, ख़ुद्दाम हमारे हों ग़ायब
सब काम मशीनों ही से चले, धोबी न रहे नाई न रहे!


अकबर "इलाहाबादी" - Akbar "Allahabadi"

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