प्रिय पाठकों! हमारा उद्देश्य आपके लिए किसी भी पाठ्य को सरलतम रूप देकर प्रस्तुत करना है, हम इसको बेहतर बनाने पर कार्य कर रहे है, हम आपके धैर्य की प्रशंसा करते है| धन्यवाद!

Wednesday, March 11, 2020

मेरी पोर-पोर - meree por-por - sachchidanand hiranand vatsyayan "agay"- सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन "अज्ञेय" #Poem Gazal Shayari #Poem_Gazal_Shayari




मेरी पोर-पोर
गहरी निद्रा में थी
जब तुमने मुझे जगाया।
हिमनिद्रा में जड़ित रीछ
हो एकाएक नया चौंकाया-यों मैं था।
पर अब! चेत गयी हैं सभी इन्द्रियाँ
एक अवश आज्ञप्ति उन्हें कर गयी सजग,
सम्पुजित; पूरा जाग गया हूँ
एक बसन्ती धूप-सने खग-रव में;
जान गया हूँ
उस पगले शिल्पी ईश्वर का क्रिया-कल्प!
फिर छुओ!
प्राण पा गयी है वह प्रस्तर प्रतिमा!

sachchidanand hiranand vatsyayan "agay"- सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन "अज्ञेय"

#Poem Gazal Shayari

#Poem_Gazal_Shayari

No comments:

Post a Comment

Most Popular 5 Free Web Camera for windows | free WebCam for windows | Free Camera

Most Popular 5 Free Web Camera for windows | Free WebCam for windows | Free Camera 1. Logitech Capture  लोगिस्टिक कैप्चर विंडोज के कुछ वेब क...