प्रिय दोस्तों! हमारा उद्देश्य आपके लिए किसी भी पाठ्य को सरलतम रूप देकर प्रस्तुत करना है, हम इसको बेहतर बनाने पर कार्य कर रहे है, हम आपके धैर्य की प्रशंसा करते है| मुक्त ज्ञानकोष, वेब स्रोतों और उन सभी पाठ्य पुस्तकों का मैं धन्यवाद देना चाहता हूँ, जहाँ से जानकारी प्राप्त कर इस लेख को लिखने में सहायता हुई है | धन्यवाद!

Monday, March 2, 2020

जोतो हे कवि, निज प्रतिभा के - joto he kavi, nij pratibha ke -Sumitra Nandan Pant - सुमित्रानंदन पंत #Poem Gazal Shayari

जोतो हे कवि, निज प्रतिभा के
फल से निष्ठुर मानव अंतर,
चिर जीर्ण विगत की खाद डाल
जन-भूमि बनाओ सम सुंदर।

बोओ, फिर जन मन में बोओ,
तुम ज्योति पंख नव बीज अमर,
जग जीवन के अंकुर हँस हँस
भू को हरीतिमा से दें भर।
पृथ्वी से खोद निराओ, कवि,
मिथ्या विश्वासों के तृण खर,
सींचो अमृतोपम वाणी की
धारा से मन, भव हो उर्वर।

नव मानवता का स्वर्ण-शस्य-
सौन्दर्य लवाओ जन-सुखकर,
तुम जग गृहिणी, जीवन किसान,
जन हित भंडार भरो निर्भर।



Sumitra Nandan Pant - सुमित्रानंदन पंत 

#Poem Gazal Shayari

#Poem_Gazal_Shayari

No comments:

Post a Comment

विंडोज कंप्यूटर पर किसी वेबसाइट को ब्लाक करने का सबसे आसान तरीका

विंडोज कंप्यूटर पर किसी वेबसाइट को ब्लाक करने का सबसे आसान तरीका    अब आप अपने कंप्यूटर सिस्टम को इंटरनेट की दुनिया में और भी सुरक्षित बना स...