बद्ध! हृत वह शक्ति किये थी जो लड़ मरने को सन्नद्ध! - baddh! hrt vah shakti kiye thee jo lad marane ko sannaddh! -sachchidanand hiranand vatsyayan "agay"- सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन "अज्ञेय" #Poem Gazal Shayari

1

बद्ध!
हृत वह शक्ति किये थी जो लड़ मरने को सन्नद्ध!
हृत इन लौह शृंखलाओं में घिर कर,
पैरों की उद्धत गति आगे ही बढऩे को तत्पर;
व्यर्थ हुआ यह आज निहत्थे हाथों ही से वार-

खंडित जो कर सकता वह जगव्यापी अत्याचार,
निष्फल इन प्राचीरों की जड़ता के आगे
आँखों की वह दृप्त पुकार कि मृत भी सहसा जागे!

2

बद्ध!

ओ जग की निर्बलते! मैं ने कब कुछ माँगा तुझ से।
आज शक्तियाँ मेरी ही फिर विमुख हुईं क्यों मुझ से?
मेरा साहस ही परिभव में है मेरा प्रतिद्वन्द्वी-
किस ललकार भरे स्वर में कहता है : 'बन्दी! बन्दी!'

इस घन निर्जन में एकाकी प्राण सुन रहे, स्तब्ध
हहर-हहर कर फिर-फिर आता एक प्रकम्पित शब्द-

बद्ध!
sachchidanand hiranand vatsyayan "agay"- सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन "अज्ञेय"

#Poem Gazal Shayari

Comments

Popular posts from this blog

ग अक्षर से शुरू होने वाले गाने | Hindi Song From Word G (ग शब्द से हिंदी गाने) | poemgazalshayari.in

इ शब्द से शुरू होने वाले हिंदी गाने | List of Hindi Song From Word I (इ/ई शब्द से हिंदी गीत ) | poemgazalshayari.in

अ से शुरू होने वाले हिंदी गाने | अंताक्षरी गाने– Hindi Song From Aa (आ शब्द से हिन्दी गाने) | Poemgazalshayari.in