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Saturday, July 13, 2019

काली रातों को भी रंगीन कहा है मैंने - kaalee raaton ko bhee rangeen kaha hai mainne - Dr. Rahat “ Indauri” - डॉ० राहत “इन्दौरी”

काली रातों को भी रंगीन कहा है मैंने
तेरी हर बात पे आमीन कहा है मैंने

तेरी दस्तार पे तन्कीद की हिम्मत तो नहीं
अपनी पापोश को कालीन कहा है मैंने

मस्लेहत कहिये इसे या के सियासत कहिये
चील-कौओं को भी शाहीन कहा है मैंने

ज़ायके बारहा आँखों में मज़ा देते हैं
बाज़ चेहरों को भी नमकीन कहा है मैंने

तूने फ़न की नहीं शिजरे की हिमायत की है
तेरे ऐजाज़ को तौहीन कहा है मैंने

Dr. Rahat “ Indauri” - डॉ०  राहत “इन्दौरी”   

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