प्रिय पाठकों! हमारा उद्देश्य आपके लिए किसी भी पाठ्य को सरलतम रूप देकर प्रस्तुत करना है, हम इसको बेहतर बनाने पर कार्य कर रहे है, हम आपके धैर्य की प्रशंसा करते है| मुक्त ज्ञानकोष, वेब स्रोतों और उन सभी पाठ्य पुस्तकों का मैं धन्यवाद देना चाहता हूँ, जहाँ से जानकारी प्राप्त कर इस लेख को लिखने में सहायता हुई है | धन्यवाद!

Sunday, April 25, 2021

इतना मत दूर रहो गन्ध कहीं खो जाए | गिरिजाकुमार माथुर | Poemgazalshayari

 इतना मत दूर रहो गन्ध कहीं खो जाए | गिरिजाकुमार माथुर


 इतना मत दूर रहो

गन्ध कहीं खो जाए

आने दो आँच

रोशनी न मन्द हो जाए


देखा तुमको मैंने कितने जन्मों के बाद

चम्पे की बदली सी धूप-छाँह आसपास

घूम-सी गई दुनिया यह भी न रहा याद

बह गया है वक़्त लिए मेरे सारे पलाश


ले लो ये शब्द

गीत भी कहीं न सो जाए

आने दो आँच

रोशनी न मन्द हो जाए


उत्सव से तन पर सजा ललचाती मेहराबें

खींच लीं मिठास पर क्यों शीशे की दीवारें

टकराकर डूब गईं इच्छाओं की नावें

लौट-लौट आई हैं मेरी सब झनकारें


नेह फूल नाजुक

न खिलना बन्द हो जाए

आने दो आँच

रोशनी न मन्द हो जाए.


क्या कुछ कमी थी मेरे भरपूर दान में

या कुछ तुम्हारी नज़र चूकी पहचान में

या सब कुछ लीला थी तुम्हारे अनुमान में

या मैंने भूल की तुम्हारी मुस्कान में


खोलो देह-बन्ध

मन समाधि-सिन्धु हो जाए

आने दो आँच

रोशनी न मन्द हो जाए


इतना मत दूर रहो

गन्ध कहीं खो जाए


हमारे इस पोस्ट को पढ़ने के लिए हम आपका आभार व्यक्त करते है | इस जानकारी को ज्यादा से ज्यादा Facebook, Whatsapp जैसे सोशल मिडिया पर जरूर शेयर करें | धन्यवाद  !!!


www.poemgazalshayari.in

No comments:

Post a Comment

इंटरनेट क्या है? इंटरनेट पर लॉगिन क्यों किया जाता है? वेबसाइट क्या है| थर्ड पार्टी एक्सेस क्या है? फेसबुक के थर्ड पार्टी ऐप को कैसे हटाए?

 इंटरनेट क्या है?  इंटरनेट पर लॉगिन क्यों किया जाता है?   वेबसाइट क्या है|  थर्ड पार्टी एक्सेस क्या है? फेसबुक के थर्ड पार्टी ऐप को कैसे हटा...