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Sunday, June 28, 2020

राम-नाम-रस पीजै - raam-naam-ras peejai- मीराबाई- Meera Bai #www.poemgazalshayari.in ||Poem|Gazal|Shaayari|Hindi Kavita|Shayari|Love||

राम-नाम-रस पीजै।

मनवा! राम-नाम-रस पीजै।

तजि कुसंग सतसंग बैठि नित, हरि-चर्चा सुणि लीजै।

काम क्रोध मद मोह लोभ कूं, चित से बाहय दीजै।

मीरा के प्रभु गिरधर नागर, ता के रंग में भीजै।


- मीराबाई- Meera Bai

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