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Tuesday, September 3, 2019

फिक्र-ए-तामीर-ए-आशियाँ भी है - phikr-e-taameer-e-aashiyaan bhee hai- - नासिर काज़मी- Nasir Kazmi

फिक्र-ए-तामीर-ए-आशियाँ भी है
खौफ-ए-बे माहरी-ए-खिजाँ भी है

खाक भी उड़ रही है रास्तों में
आमद-ए-सुबह-ए-समाँ भी है

रंग भी उड़ रहा है फूलों का
गुंचा-गुंचा सर्द-फसाँ भी है

ओस भी है कहीं-कहीं लरज़ाँ
बज़्म-ए-अंजुमन धुआँ-धुआँ भी है

कुछ तो मौसम भी है ख़याल अंगेज़
कुछ तबियत मेरी रवाँ भी है

कुछ तेरा हुस्न भी है होश-रुबा
कुछ मेरी शौकी-ए-बुताँ भी है

हर नफ्स शौक भी है मंजिल का
हर कदम याद-ए-रफ्तुगाँ भी है

वजह-ए-तस्कीं भी है ख़याल उसका
हद से बढ़ जाये तो गिराँ भी है

ज़िन्दगी जिस के दम से है नासिर
याद उसकी अज़ाब-ए-जाँ भी है

- नासिर काज़मी- Nasir Kazmi


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