पराई आग पे रोटी नहीं बनाऊँगा -paraee aag pe rotee nahin banaoonga-Tahzeeb Hafi - तहज़ीब हाफ़ी

पराई आग पे रोटी नहीं बनाऊँगा  मैं भीग जाऊँगा छतरी नहीं बनाऊँगा   मैं जंगलों की तरफ़ चल पड़ा हूँ छोड़ के घर  ये क्या कि घर की उदासी भी साथ हो गई है 

Tahzeeb Hafi - तहज़ीब हाफ़ी 

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