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Sunday, July 4, 2021

अब जो कोई पूछे भी तो उस से क्या शरह-ए-हालात करें | फ़ैज़ अहमज फ़ैज़ | Faiz Ahamad Faiz | फ़ैज़ अहमज फ़ैज़ shayari Poemgazalshayari.in

फ़ैज़ अहमज फ़ैज़  | Faiz Ahamad Faiz | फ़ैज़ अहमज फ़ैज़ shayari Poemgazalshayari.in


 अब जो कोई पूछे भी तो उस से क्या शरह-ए-हालात करें 

दिल ठहरे तो दर्द सुनाएँ दर्द थमे तो बात करें 

शाम हुई फिर जोश-ए-क़दह ने बज़्म-ए-हरीफ़ाँ रौशन की 

घर को आग लगाएँ हम भी रौशन अपनी रात करें 


क़त्ल-ए-दिल-ओ-जाँ अपने सर है अपना लहू अपनी गर्दन पे 

मोहर-ब-लब बैठे हैं किस का शिकवा किस के साथ करें 

हिज्र में शब भर दर्द-ओ-तलब के चाँद सितारे साथ रहे 

सुब्ह की वीरानी में यारो कैसे बसर औक़ात करें 

 

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