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Sunday, July 4, 2021

आए कुछ अब्र कुछ शराब आए | फ़ैज़ अहमज फ़ैज़ | Faiz Ahamad Faiz | फ़ैज़ अहमज फ़ैज़ shayari Poemgazalshayari.in

फ़ैज़ अहमज फ़ैज़  | Faiz Ahamad Faiz | फ़ैज़ अहमज फ़ैज़ shayari Poemgazalshayari.in


 आए कुछ अब्र कुछ शराब आए 

इस के बा'द आए जो अज़ाब आए 

बाम-ए-मीना से माहताब उतरे 

दस्त-ए-साक़ी में आफ़्ताब आए 


हर रग-ए-ख़ूँ में फिर चराग़ाँ हो 

सामने फिर वो बे-नक़ाब आए 

उम्र के हर वरक़ पे दिल की नज़र 

तेरी मेहर-ओ-वफ़ा के बाब आए 


कर रहा था ग़म-ए-जहाँ का हिसाब 

आज तुम याद बे-हिसाब आए 

न गई तेरे ग़म की सरदारी 

दिल में यूँ रोज़ इंक़लाब आए 


जल उठे बज़्म-ए-ग़ैर के दर-ओ-बाम 

जब भी हम ख़ानुमाँ-ख़राब आए 

इस तरह अपनी ख़ामुशी गूँजी 

गोया हर सम्त से जवाब आए 


'फ़ैज़' थी राह सर-ब-सर मंज़िल 

हम जहाँ पहुँचे कामयाब आए 


- फ़ैज़ अहमज फ़ैज़  | Faiz Ahamad Faiz | फ़ैज़ अहमज फ़ैज़ shayari Poemgazalshayari.in


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