प्रिय पाठकों! हमारा उद्देश्य आपके लिए किसी भी पाठ्य को सरलतम रूप देकर प्रस्तुत करना है, हम इसको बेहतर बनाने पर कार्य कर रहे है, हम आपके धैर्य की प्रशंसा करते है| मुक्त ज्ञानकोष, वेब स्रोतों और उन सभी पाठ्य पुस्तकों का मैं धन्यवाद देना चाहता हूँ, जहाँ से जानकारी प्राप्त कर इस लेख को लिखने में सहायता हुई है | धन्यवाद!

Thursday, October 1, 2020

जाति हुती सखी गोहन में, मन मोहन को, लखिकै ललचानो - Jati huti sakhi gohan mein, man mohan ko, lakhikai lalchano -Rahim- abdul rahim khan-i-khana रहीम- अब्दुल रहिम खान-ए-ख़ाना

 जाति हुती सखी गोहन में, मन मोहन को, लखिकै ललचानो।

नागर नारि नई ब्रज की, उनहूँ नँदलाल को रीझिबो जानो॥

जाति भई फिरि कै चितई, तब भाव ’रहीम’ यहै उर आनो।

ज्यों कमनैत दमानक में फिरि तीरि सों मारि लै जात निसानो॥


Rahim- abdul rahim khan-i-khana

रहीम- अब्दुल रहिम खान-ए-ख़ाना

No comments:

Post a Comment

इंटरनेट क्या है? इंटरनेट पर लॉगिन क्यों किया जाता है? वेबसाइट क्या है| थर्ड पार्टी एक्सेस क्या है? फेसबुक के थर्ड पार्टी ऐप को कैसे हटाए?

 इंटरनेट क्या है?  इंटरनेट पर लॉगिन क्यों किया जाता है?   वेबसाइट क्या है|  थर्ड पार्टी एक्सेस क्या है? फेसबुक के थर्ड पार्टी ऐप को कैसे हटा...