तुम इतनी देर तक घूरते रहे अंधेरे को - tum itanee der tak ghoorate rahe andhere ko -- गीत चतुर्वेदी - Geet Chaturvedi #poemgazalshayari.in
तुम इतनी देर तक घूरते रहे अंधेरे को
कि तुम्हारी पुतलियों का रंग काला हो गया
किताबों को ओढा इस तरह
कि शरीर कागज़ हो गया
कहते रहे मौत आए तो इस तरह
जैसे पानी को आती है
वह बदल जाता है भाप में
आती है पेड़ को
वह दरवाज़ा बन जाता है
जैसे आती है आग को
वह राख बन जाती है
तुम गाय का थान बन जाना
दूध बनकर बरसना
भाप बनकर चलाना बड़े-बड़े इंजन
भात पकाना
जिस रास्ते को हमेशा बंद रहने का शाप मिला
उस पर दरवाज़ा बनकर खुलना
राख से मांजना बीमार माँ की पलंग के नीचे रखे बासन
तुम एक तीली जलाना
उसे देर तक घूरना
- गीत चतुर्वेदी - Geet Chaturvedi
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