गोरी-गोरी सौंधी धरती-कारे-कारे बीज - goree-goree saundhee dharatee-kaare-kaare beej --धर्मवीर भारती - Dharamvir Bharti #dharmveerbharti #धर्मवीर #poemgazalshayari.in
गोरी-गोरी सौंधी धरती-कारे-कारे बीज
बदरा पानी दे!
क्यारी-क्यारी गूंज उठा संगीत
बोने वालो! नई फसल में बोओगे क्या चीज ?
बदरा पानी दे!
मैं बोऊंगा बीर बहूटी, इन्द्रधनुष सतरंग
नये सितारे, नयी पीढियाँ, नये धान का रंग
बदरा पानी दे!
हम बोएंगे हरी चुनरियाँ, कजरी, मेहँदी
राखी के कुछ सूत और सावन की पहली तीज!
बदरा पानी दे!
-धर्मवीर भारती - Dharamvir Bharti
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