प्रिय पाठकों! हमारा उद्देश्य आपके लिए किसी भी पाठ्य को सरलतम रूप देकर प्रस्तुत करना है, हम इसको बेहतर बनाने पर कार्य कर रहे है, हम आपके धैर्य की प्रशंसा करते है| मुक्त ज्ञानकोष, वेब स्रोतों और उन सभी पाठ्य पुस्तकों का मैं धन्यवाद देना चाहता हूँ, जहाँ से जानकारी प्राप्त कर इस लेख को लिखने में सहायता हुई है | धन्यवाद!

Wednesday, March 11, 2020

ओ रिपु! मेरे बन्दी-गृह की तू खिड़की मत खोल! - o ripu! mere bandee-grh kee too khidakee mat khol! -sachchidanand hiranand vatsyayan "agay"- सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन "अज्ञेय" #Poem Gazal Shayari


ओ रिपु! मेरे बन्दी-गृह की तू खिड़की मत खोल!
बाहर-स्वतन्त्रता का स्पन्दन! मुझे असह उस का आवाहन!
मुझ कँगले को मत दिखला वह दु:सह स्वप्न अमोल!
कह ले जो कुछ कहना चाहे, ले जा, यदि कुछ अभी बचा है!

रिपु हो कर मेरे आगे वह एक शब्द मत बोल!
बन्दी हूँ मैं, मान गया हूँ, तेरी सत्ता जान गया हूँ-
अचिर निराशा के प्याले में फिर वह विष मत घोल!
अभी दीप्त मेरी ज्वाला है, यदपि राख ने ढँप डाला है

उसे उड़ाने से पहले तू अपना वैभव तोल!
नहीं! झूठ थी वह निर्बलता! भभक उठी अब वह विह्वलता!
खिड़की? बन्धन? सँभल कि तेरा आसन डाँवाडोल!
मुझ को बाँधे बेड़ी-कडिय़ाँ? गिन तू अपने सुख की घडिय़ाँ!
मुझ अबाध के बन्दी-गृह की तू खिड़की मत खोल।

sachchidanand hiranand vatsyayan "agay"- सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन "अज्ञेय"

#Poem Gazal Shayari

No comments:

Post a Comment

स्कालरशिप ऑनलाइन में क्या दस्तावेज लगते है | Apply Scholorship Form | वजीफा ऑनलाइन | How to Apply scholorship | poemgazalshayari

स्कालरशिप ऑनलाइन में क्या दस्तावेज लगते है | Apply Scholorship Form | वजीफा ऑनलाइन | How to Apply scholorship | poemgazalshayari  यदि आप एक ...