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Saturday, February 15, 2020

चौदहवीं रात के इस चाँद तले - chaudahaveen raat ke is chaand tale - गुलजार - Gulzar -Poem Gazal Shayari

चौदहवीं रात के इस चाँद तले
सुरमई रात में साहिल के क़रीब
दूधिया जोड़े में आ जाए जो तू
ईसा के हाथ से गिर जाए सलीब
बुद्ध का ध्यान चटख जाए ,कसम से
तुझ को बर्दाश्त न कर पाए खुदा भी

दूधिया जोड़े में आ जाए जो तू
चौदहवीं रात के इस चाँद तले !

गुलजार - Gulzar

-Poem Gazal Shayari

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