प्रिय पाठकों! हमारा उद्देश्य आपके लिए किसी भी पाठ्य को सरलतम रूप देकर प्रस्तुत करना है, हम इसको बेहतर बनाने पर कार्य कर रहे है, हम आपके धैर्य की प्रशंसा करते है| धन्यवाद!

Sunday, October 13, 2019

चन्द कलियाँ निशात की चुनकर - chand kaliyaan nishaat kee chunakar - -साहिर_लुधियानवी - saahir ludhiyaanavee

चन्द कलियाँ निशात की चुनकर
मुद्दतों मह्वे-यास रहता हूँ
तेरा मिलना ख़ुशी की बात सही
तुझ से मिल कर उदास रहता हूँ

तपते दिल पर यूं गिरती है
तेरी नज़र से प्यार की शबनम
जलते हुए जंगल पर जैसे
बरखा बरसे रुक-रुक, थम-थम

जहाँ-जहाँ तेरी नज़र की ओस टपकी थी
वहां-वहां से अभी तक ग़ुबार उठता है
जहाँ-जहाँ तेरे जल्वों के फूल बिखरे थे
वहां-वहां दिले-वहशी पुकार उठता है

न मुंह छुपा के जिए हम,न सर झुका के जिए
सितमगरों की नज़र से नज़र मिला के जिए
अब एक रात अगर कम जिए,तो कम ही सही
यही बहुत है कि हम मश्अलें जला के जिए

-साहिर_लुधियानवी - saahir ludhiyaanavee

1 comment:

  1. I love the lines whatsoever wrote by Ludhiyanvi Sahab, thanks

    ReplyDelete

Teri Muhabbat ne sikhaya, mujhe bharosha karna | Love Shyaari | Pyar shyari | shayari with image | couple shayari

 Teri Muhabbat ne sikhaya, mujhe bharosha karna, warna ek sa samjh sabko, gunah kar baitha tha. -Ambika Rahee हमारे इस पोस्ट को पढ़ने के लिए ...