जीवन क्या है चलता फिरता एक खिलौना है - jeevan kya hai chalata phirata ek khilauna hai - - निदा फ़ाज़ली - Nida Fazli
जीवन क्या है चलता फिरता एक खिलौना है
दो आँखों में एक से हँसना एक से रोना है
जो जी चाहे वो मिल जाये कब ऐसा होता है
हर जीवन जीवन जीने का समझौता है
अब तक जो होता आया है वो ही होना है
रात अँधेरी भोर सुहानी यही ज़माना है
हर चादर में दुख का ताना सुख का बाना है
आती साँस को पाना जाती साँस को खोना है
- निदा फ़ाज़ली - Nida Fazli
Comments
Post a Comment