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Wednesday, December 16, 2020

जिहि फन फुत्कार उड़त पहाड़ भार - भूषण - Bhushan

December 16, 2020 0 Comments

 जिहि फन फुत्कार उड़त पहाड़ भार,

           कूरम कठिन जनु कमल बिदगिलो.

विवजल ज्वालामुखी लवलीन होत जिन,

           झारन विकारी मद दिग्गज उगलिगो.

कीन्हो जिहि पण पयपान सो जहान कुल,

           कोलहू उछलि जलसिंधु खलभलिगो.

खग्ग खगराज महराज सिवराज जू को,

           अखिल भुजंग मुगलद्द्ल निगलिगो.


- भूषण - Bhushan

चकित चकत्ता चौंकि चौंकि उठै बार बार - भूषण - Bhushan

December 16, 2020 0 Comments

 चकित चकत्ता चौंकि चौंकि उठै बार बार,

           दिल्ली दहसति चितै चाहि करषति है.

बिलखि बदन बिलखत बिजैपुर पति,

           फिरत फिरंगिन की नारी फरकति है.

थर थर काँपत क़ुतुब साहि गोलकुंडा,

           हहरि हवस भूप भीर भरकति है.

राजा सिवराज के नगारन की धाक सुनि,

           केते बादसाहन की छाती धरकति है.


- भूषण - Bhushan

दारा की न दौर यह, रार नहीं खजुबे की - भूषण - Bhushan

December 16, 2020 0 Comments

 दारा की न दौर यह, रार नहीं खजुबे की,

              बाँधिबो नहीं है कैंधो मीर सहवाल को.

मठ विश्वनाथ को, न बास ग्राम गोकुल को,

              देवी को न देहरा, न मंदिर गोपाल को.

गाढ़े गढ़ लीन्हें अरु बैरी कतलाम कीन्हें,

              ठौर ठौर हासिल उगाहत हैं साल को.

बूड़ति है दिल्ली सो सँभारे क्यों न दिल्लीपति,

              धक्का आनि लाग्यौ सिवराज महाकाल को


- भूषण - Bhushan

सबन के ऊपर ही ठाढ़ो रहिबे के जोग - भूषण - Bhushan

December 16, 2020 0 Comments

 सबन के ऊपर ही ठाढ़ो रहिबे के जोग,

             ताहि खरो कियो जाय जारन के नियरे .

जानि गैर मिसिल गुसीले गुसा धारि उर,

             कीन्हों न सलाम, न बचन बोलर सियरे.

भूषण भनत महाबीर बलकन लाग्यौ,

             सारी पात साही के उड़ाय गए जियरे .

तमक तें लाल मुख सिवा को निरखि भयो,

             स्याम मुख नौरंग, सिपाह मुख पियरे.


- भूषण - Bhushan

दाढ़ी के रखैयन की दाढ़ी सी रहत छाती - भूषण - Bhushan

December 16, 2020 0 Comments

 दाढ़ी के रखैयन की दाढ़ी सी रहत छाती

            बाढ़ी मरजाद जसहद्द हिंदुवाने की

कढ़ी गईं रैयत के मन की कसक सब

            मिटि गईं ठसक तमाम तुकराने की

भूषण भनत दिल्लीपति दिल धक धक

            सुनि सुनि धाक सिवराज मरदाने की

मोटी भई चंडी,बिन चोटी के चबाये सीस

            खोटी भई अकल चकत्ता के घराने की


- भूषण - Bhushan

इंद्र निज हेरत फिरत गज इंद्र अरु - भूषण - Bhushan

December 16, 2020 0 Comments

 इंद्र निज हेरत फिरत गज इंद्र अरु,

इंद्र को अनुज हेरै दुगध नदीश कौं.

भूषण भनत सुर सरिता कौं हंस हेरै,

विधि हेरै हंस को चकोर रजनीश कौं.

साहि तनै सिवराज करनी करी है तैं,

जु होत है अच्मभो देव कोटियो तैंतीस को.

पावत न हेरे जस तेरे में हिराने निज,

गिरि कों गिरीस हेरैं गिरजा गिरीस को.


- भूषण - Bhushan

बाने फहराने घहराने घंटा गजन के - भूषण - Bhushan

December 16, 2020 0 Comments

 बाने फहराने घहराने घंटा गजन के,

नाहीं ठहराने राव राने देस-देस के.


नग भहराने ग्राम नगर पराने सुनि,

बाजत निशने सिवराज जू नरेस के.


हाथिन के हौदा उकसाने ,कुम्भ कुंजर के,

भौन को भजाने अलि छूटे लट केस के.


दल को दरारेन ते कमठ करारे फूटे,

कर के से पात बिहराने फन सेस के


- भूषण - Bhushan

साजि चतुरंग सैन अंग में उमंग धरि - भूषण - Bhushan

December 16, 2020 0 Comments

 साजि चतुरंग सैन अंग में उमंग धरि

सरजा सिवाजी जंग जीतन चलत है

भूषण भनत नाद बिहद नगारन के

नदी-नद मद गैबरन के रलत है

ऐल-फैल खैल-भैल खलक में गैल गैल

गजन की ठैल –पैल सैल उसलत है

तारा सो तरनि धूरि-धारा में लगत जिमि

थारा पर पारा पारावार यों हलत है


- भूषण - Bhushan

प्रेतिनी पिसाच अरु निसाचर निशाचरहू - भूषण - Bhushan

December 16, 2020 0 Comments

 प्रेतिनी पिसाच अरु निसाचर निशाचरहू,

मिलि मिलि आपुस में गावत बधाई हैं.


भैरो भूत-प्रेत भूरि भूधर भयंकर से,

जुत्थ जुत्थ जोगिनी जमात जुरि आई हैं.


किलकि किलकि के कुतूहल करति कलि,

डिम-डिम डमरू दिगम्बर बजाई हैं.


सिवा पूछें सिव सों समाज आजु कहाँ चली,

काहु पै सिवा नरेस भृकुटी चढ़ाई हैं.


- भूषण - Bhushan

ता दिन अखिल खलभलै खल खलक में - ta din akhil khalabhalai khal khalak mein - भूषण - Bhushan

December 16, 2020 0 Comments

 ता दिन अखिल खलभलै खल खलक में,

जा दिन सिवाजी गाजी नेक करखत हैं.

सुनत नगारन अगार तजि अरिन की,

दागरन भाजत न बार परखत हैं.

छूटे बार बार छूटे बारन ते लाल ,

देखि भूषण सुकवि बरनत हरखत हैं .

क्यों न उत्पात होहिं बैरिन के झुण्डन में,

करे घन उमरि अंगारे बरखत हैं .


- भूषण - Bhushan

तरो अवतार जम पोसन करन हार - taro avataar jam posan karan haar - भूषण - Bhushan

December 16, 2020 0 Comments

 तेरे हीं भुजान पर भूतल को भार,

कहिबे को सेसनाग दिननाग हिमाचल है.


तरो अवतार जम पोसन करन हार,

कछु करतार को न तो मधि अम्ल है.


सहित में सरजा समत्थ सिवराज कवि,

भूषण कहत जीवो तेरोई सफल है.


तेरो करबाल करै म्लेच्छन को काल बिनु,

काज होत काल बदनाम धरातल है.


- भूषण - Bhushan

गरुड़ को दावा जैसे नाग के समूह पर - garud ko daava jaise naag ke samooh par - भूषण - Bhushan

December 16, 2020 0 Comments

 गरुड़ को दावा जैसे नाग के समूह पर

दावा नाग जूह पर सिंह सिरताज को

दावा पूरहूत को पहारन के कूल पर

दावा सब पच्छिन के गोल पर बाज को

भूषण अखंड नव खंड महि मंडल में

रवि को दावा जैसे रवि किरन समाज पे

पूरब पछांह देश दच्छिन ते उत्तर लौं

जहाँ पातसाही तहाँ दावा सिवराज को


- भूषण - Bhushan

Tuesday, December 15, 2020

राखी हिन्दुवानी हिन्दुवान को तिलक राख्यौ - - भूषण - Bhushan

December 15, 2020 0 Comments

 राखी हिन्दुवानी हिन्दुवान को तिलक राख्यौ

अस्मृति पुरान राखे वेद धुन सुनी मैं

राखी रजपूती राजधानी राखी राजन की

धरा मे धरम राख्यौ ज्ञान गुन गुनी मैं

भूषन सुकवि जीति हद्द मरहट्टन की

देस देस कीरत बखानी सब सुनी मैं

साहि के सपूत सिवराज शमशीर तेरी

दिल्ली दल दाबि के दिवाल राखी दुनी मैं


- भूषण - Bhushan

ब्रह्म के आनन तें निकसे अत्यंत पुनीत तिहूँ पुर मानी - brahm ke aanan ten nikase atyant puneet tihoon pur maanee -- भूषण - Bhushan

December 15, 2020 0 Comments

 ब्रह्म के आनन तें निकसे अत्यंत पुनीत तिहूँ पुर मानी .

राम युधिष्ठिर के बरने बलमीकहु व्यास के अंग सोहानी.

भूषण यों कलि के कविराजन राजन के गुन गाय नसानी.

पुन्य चरित्र सिवा सरजे सर न्हाय पवित्र भई पुनि बानी .


- भूषण - Bhushan

इन्द्र जिमि जंभ पर, बाडब सुअंभ पर - indr jimi jambh par, baadab suambh par -- भूषण - Bhushan

December 15, 2020 0 Comments

 इन्द्र जिमि जंभ पर, बाडब सुअंभ पर,

रावन सदंभ पर, रघुकुल राज हैं।


पौन बारिबाह पर, संभु रतिनाह पर,

ज्यौं सहस्रबाह पर राम-द्विजराज हैं॥


दावा द्रुम दंड पर, चीता मृगझुंड पर,

'भूषन वितुंड पर, जैसे मृगराज हैं।


तेज तम अंस पर, कान्ह जिमि कंस पर,

त्यौं मलिच्छ बंस पर, सेर शिवराज हैं॥


ऊंचे घोर मंदर के अंदर रहन वारी,

ऊंचे घोर मंदर के अंदर रहाती हैं।


कंद मूल भोग करैं, कंद मूल भोग करैं,

तीन बेर खातीं, ते वे तीन बेर खाती हैं॥


भूषन शिथिल अंग, भूषन शिथिल अंग,

बिजन डुलातीं ते वे बिजन डुलाती हैं।


'भूषन भनत सिवराज बीर तेरे त्रास,

नगन जडातीं ते वे नगन जडाती हैं॥


छूटत कमान और तीर गोली बानन के,

मुसकिल होति मुरचान की ओट मैं।


ताही समय सिवराज हुकुम कै हल्ला कियो,

दावा बांधि परा हल्ला बीर भट जोट मैं॥


'भूषन' भनत तेरी हिम्मति कहां लौं कहौं

किम्मति इहां लगि है जाकी भट झोट मैं।


ताव दै दै मूंछन, कंगूरन पै पांव दै दै,

अरि मुख घाव दै-दै, कूदि परैं कोट मैं॥


बेद राखे बिदित, पुरान राखे सारयुत,

रामनाम राख्यो अति रसना सुघर मैं।


हिंदुन की चोटी, रोटी राखी हैं सिपाहिन की,

कांधे मैं जनेऊ राख्यो, माला राखी गर मैं॥


मीडि राखे मुगल, मरोडि राखे पातसाह,

बैरी पीसि राखे, बरदान राख्यो कर मैं।


राजन की हद्द राखी, तेग-बल सिवराज,

देव राखे देवल, स्वधर्म राख्यो घर मैं॥


- भूषण - Bhushan

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